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Varanasi News: आदित्य एल-1 की सफलता पर टिकीं सबकी निगाहें, मनेगा जश्न

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देश के पहले सूर्य मिशन आदित्य एल-1 की सफलता पर बीएचयू की निगाहें भी टिकी हैं। बीएचयू के भौतिकी विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अलकेंद्र सिंह और आईआईटी बीएचयू के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ अभिषेक श्रीवास्तव मिशन के सोलर अल्ट्रावॉयलेट इमेजिंग टेलीस्कोप टीम से जुड़े हैं। शनिवार की सुबह ही आदित्य एल-1 की लॉन्चिंग होगी। इसे लेकर विज्ञानियों के साथ ही काशीवासी भी उत्साहित हैं। सफलता के साथ ही सब जश्न मनाने की तैयारी में हैं।
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बचपन से चांद और सूरज को जानने की जिद
बीएचयू के भौतिकी विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अलकेंद्र सिंह को बचपन से ही चांद और सूरज को जानने की जिद है। अक्सर दूरबीन से चांद और सूरज देखते थे, फिर अपने मां-पिता से सवाल करते थे कि चांद और सूरज इतनी दूर क्यों हैं? दूरबीन कैसे बना? दूरबीन, अंतरिक्ष अभियान और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को जानने के लिए रोमांच आता था। फिर इनसे जुड़े विषयों पर अध्ययन शुरू किया। सेंट्रल हिंदू बॉयज स्कूल से पढ़ाई के दौरान 10वीं और 12वीं में साइंस में अच्छा नंबर मिला। फिर बीएचयू से बीएससी और एमएससी किया।
डॉ अलकेंद्र ने बताया कि पढ़ाई के दौरान कोई खगोल विश्वविद्यालय या खगोल से जुड़ा क्लब नहीं था। वाराणसी में तारामंडल भी नहीं था। इससे कई बार खगोल विज्ञान से जुड़े छात्रों को परेशानी होती है। इसके लिए बीएचयू लाइब्रेरी में जाता था। खगोल विज्ञान से जुड़ी पुस्तकें पढ़ता था। बीएचयू में एमएससी के दौरान मुझे बंगलूरू के भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान में काम करने का मौका मिला। इस दौरान बहुत कुछ सीखा। डॉ. अलकेंद्र बताते हैं कि क्योटो विश्वविद्यालय में प्रवास के दौरान प्रोफेसर कजुनारी शिबाता (पूर्व में क्योटो विश्वविद्यालय, जापान) के साथ काम करने का अनुभव मेरे जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। मैंने भारत के एक प्रमुख खगोल भौतिकीविद प्रोफेसर शशिकुमार चित्रे (पूर्व में टीआईएफआर, मुंबई में) से भी बहुत कुछ सीखा। आदित्य एल-1 मिशन का हिस्सा बन कर खुशी हो रही है। लॉन्चिंग को लेकर काफी उत्साहित हूं।
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पैशन को बनाया लक्ष्य, मिली कामयाबी
आईआईटी बीएचयू के भौतिक विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रो. अभिषेक श्रीवास्तव की भी बचपन से ही खगोल विज्ञान में रुचि थी। यही वजह रही कि उन्होंने अपने पैशन को लक्ष्य बनाया और कामयाबी हासिल की। पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहे। उन्होंने बताया कि खगोल भौतिकी और सौर भौतिकी के क्षेत्र में शोध किया है। इसी के चलते सूर्य मिशन का हिस्सा बना हूं। आदित्य एल-1 देश का पहला सूर्य मिशन है। इसको लेकर काफी उत्साहित हूं। आईआईटी बीएचयू से पहले नैनीताल के आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट का भी बतौर वैज्ञानिक हिस्सा रहा हूं। 2007 में यूके के अर्मघ ऑब्जर्वेटरी में प्रो. जॉन जी डॉयल के पोस्ट डॉक्टोरल रिसर्च असिस्टेंट के तौर पर काम किया। उन्होंने बताया कि पिछले कई वर्षों से हम उन भौतिक प्रक्रियाओं को समझने में लगे हैं, जो सूर्य के कोरोना और क्रोमोस्फीयर को गर्म कर सकती हैं। इसके अलावा सौर भौतिकी के क्षेत्र में हो रहे अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रहा हूं।
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