सेमिनार में मौजूद उद्यमियों ने किया विमर्श।
- फोटो : अमर उजाला
उद्यमियों की सुगमता के लिए बने इज ऑफ डूइंग बिजनेस का सरकारी विभागों ने मजाक बनाकर रख दिया है। उद्यमी उद्योग कम और विभाग का क्लर्क ज्यादा प्रतीत होता है। हर महीने ऑनलाइन जानकारियां देने के बाद भी विभाग संतुष्ट नहीं होता है। कार्यालय जाकर संबंधित प्रपत्रों की हार्ड कॉपी भी देनी पड़ती है। यह बातें इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आरके चौधरी ने बुधवार शाम ककरमत्ता के होटल में सेमिनार में कहीं।
आईआईए, एसआईए और आरआईए की ओर से सेमिनार में चार्टर्ड अकाउंटेंट जीडी दुबे ने कहा कि हर बार आईटीसी के प्रावधानों में बदलाव हो जाता है। इस बार भी आईटीसी के सेक्शन 16 में पुराने कर प्रावधानों के साथ-साथ दो नए प्रावधान 5 और 6 जोड़ दिए गए हैं।
2017-18 से 2020- 21 की आईटीसी यदि 30 नवंबर 2021 तक ली गई है तो उसे मान लिया गया है। इसी बीच में जमा ब्याज पेनाल्टी, रिफंड पर स्पष्टता नहीं है। सेक्शन 72 के तहत नोटिस की बकाया धनराशि को मार्च 2025 तक बिना ब्याज एवं पेनाल्टी के जमा करने की छूट प्रदान दी गई है।
अधिवक्ता शुभम कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि कॉमर्शियल कोर्ट एक्ट 2015 के तहत तीन लाख से अधिक धनराशि के व्यावसायिक विवादों के निपटारे के लिए उद्यमी व्यापारी संपर्क कर सकते हैं। स्वागत राजेश भाटिया, संचालन नीरज पारीक, धन्यवाद मनीष कटारिया ने दिया। सेमिनार में प्रशांत अग्रवाल, अनुपम देवा, प्रेम मिश्रा, अशोक जायसवाल, श्रीनारायण खेमका आदि रहे।