वाराणसी। बिजली निगम के निजीकरण का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को कर्मचारियों ने उपकेंद्रों पर प्रदर्शन कर निजीकरण का प्रस्ताव वापस न होने तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर विरोध चल रहा है। आरके वाही, ओपी सिंह, अंकुर पांडेय ने बताया कि पावर सेक्टर में निजी घरानों की भागीदारी किसी भी प्रकार से उपभोक्ताओं के हित में नहीं है। इसे हर हाल में रोका जाना चाहिए। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का एकतरफा निर्णय निरस्त किया जाना चाहिए। बिजली कर्मियों और अभियंताओं के विरोध के बाद भी पॉवर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने निजीकरण के नाम पर हजारों पदों को समाप्त कर लेसा में आज से नई व्यवस्था लागू कर दी है। बड़ी बात यह है कि सरकार ने निजी क्षेत्र की कंपनियों को सीएजी ऑडिट से मुक्त रखा है। अगर निजी कंपनियों का सीएजी ऑडिट नहीं होता है तो लाभ हानि का सही लेखा जोखा नहीं मिल पाता है। ब्यूरो