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Eid-e-gadeer:गंगा के तट पर सजी ईद-ए-गदीर की 150 साल पुरानी महफिल

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शिया हजरात के सबसे बड़े त्योहार ईद-ए-गदीर का जश्न सोमवार से ही शुरू हो गया। गदीर की पूर्व संध्या पर जश्न और महफिलों का सिलसिला शुरू हो गया। गंगा के तट पर 150 साल पुरानी महफिल सजाई गई और शायरों ने हजरत अली के मौला बनाए जाने के जश्न को अपने-अपने कलाम के जरिये पेश किया।
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सोमवार को 17 जिलहिज्जा पर शहर के शिया हजरात ने ईद-ए-गदीर की पूर्व संध्या पर हजरत अली के मौला बनाए जाने का जश्न शुरू किया। शाम की नमाज के बाद शिया मस्जिद कालीमहल में महफिल को खिताब करते हुए हाजी फरमान हैदर ने कहा कि 1435 साल पहले हज से लौटते समय सवा लाख हाजियों के बीच गदीर नामक स्थान पर अली को अपना जानशीन बनाया। कहा, जिस जिस का मैं मौला हूं, उनके भी मौला अली हैं। अली मेरे जानशीन हैं और अली मेरे भाई हैं। इसी तरह शहर भर की 33 शिया मस्जिदों में शाम की नमाज के बाद खुशियों के माहौल में हर तरफ मौला अली, मौला अली की सदाएं गूंजती रहीं।
150 साल पुरानी कदीमी महफिल करारा हाउस तेलियानाला में शायरों के कलाम से सजाई गई। फरमान हैदर ने बताया कि 25 जून को सुबह पांच बजे भेलूपुर में महफिल सजेगी। दोषीपुरा में नौ बजे जुलूस उठेगा और मस्जिदों में ईद-ए-गदीर की नमाज और आमाल होगा। भदैनी और पत्थरगलिया में दिन में 10 बजे और 11 बजे महफिल का आयोजन होगा। कई स्थानों पर मौला अली के नाम पर दस्तरख्वान सजेगा। शाम 4 बजे गंगा किनारे करारा हाउस पर हजारों की तादाद में लोग गदीर मनाने के लिए एकत्र होंगे। शायर कलाम पेश करेंगे और नूरानी तकरीर होगी। महफिलों का कार्यक्रम 27 जून तक जारी रहेगा।
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