जिला राइफल क्लब खिलाड़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। 2008 के बाद फायर आर्म्स नहीं आए हैं। 2018 में दो एयर पिस्टल आए, लेकिन खिलाड़ियों का दबाव नहीं झेल सके। वह दो वर्ष से खराब पड़े हैं। शूटिंग रेंज में खिलाड़ी खराब पिस्टल से ही अभ्यास कर रहे हैं। क्लब के आजीवन सदस्य और 2014 से निशानेबाजी कर रहे सत्यम सिंह ने बताया कि खिलाड़ी रेंज पर मेहनत करते हैं, लेकिन खराब हथियार की वजह से वह पदक नहीं जीत पा रहे हैं। क्लब के हथियार 15 वर्ष साल पुराने और जर्जर हो चुके हैं। इनका पुर्जा-पुर्जा हिल रहा है। यहां रोज करीब 35 खिलाड़ी अभ्यास करते हैं।
प्रतियोगिता के लिए भाड़े पर लेते हैं हथियार
शूटिंग रेंज पर खिलाड़ी किसी तरह अभ्यास कर लेते हैं, लेकिन प्रतियोगिता के लिए उन्हें भाड़े पर हथियार लेना पड़ता है। एक मैच के लिए करीब छह हजार रुपये देने पड़ते हैं। अगर दो इवेंट में प्रतिभाग कर लिया तो यह दोगुना हो जाता है। लाइसेंस के लिए भी भागदौड़ करनी पड़ती है।
महंगे दर पर खरीदना पड़ता है कारतूस
पहले यूपीएसआरए जिला राइफल क्लब को कारतूस देता था। जो पिछले कुछ साल से नहीं मिल रहा है। सत्यम ने बताया कि खिलाड़ी 10-15 गोली मुश्किल से जुटाकर अभ्यास करते हैं। शिवम पटेल (बदला नाम) ने बताया कि उन्होेंने अभ्यास एयर गन से किया और दिल्ली में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में फायर आर्म्स पर हाथ आजमाया अगर राइफल क्लब में सुविधा मिले तो खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन कर सकते हैं। राइफल क्लब के कार्यकारिणी सदस्य पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि क्लब में काफी सुविधाएं मिल रही हैं। अभी इसमें और सुधार किया जा रहा है। फायर आर्म्स में कुछ दिक्कतें हैं, 2018 में दो एयर पिस्टल आई थी, खिलाड़ी उससे अभ्यास कर रहे हैं। ज्यादातर खिलाड़ियों के पास अपने हथियार हैं।