बीएचयू के महिला महाविद्यालय में गांधी की पुनर्कल्पना : 2047 में विकसित भारत के लिए विचारधारा, नैतिकता और शिक्षा विषय पर सोमवार को दो दिन की अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। कॉन्फ्रेंस हॉल में शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने गांधीजी की विचारधारा, नैतिकता और शिक्षा के बदलते स्तर पर चर्चा की। प्राचार्या प्रो. रीता सिंह ने कहा कि गांधीजी के सिद्धांत आज भी समाज के नैतिक पुनर्निर्माण, शांति स्थापना और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए प्रेरणास्रोत हैं। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पूर्व कुलपति प्रो. पृथ्वीश नाग ने सत्य, अहिंसा और उनकी आत्मकथा की खासियत बताई। डॉ. आरके पांडेय ने उच्च विचार और सरल जीवन की गांधीवादी विचारधारा अपनाने की बात कही।