डकैती के आरोपियों से सांठ-गांठ का दोष उजागर हुआ तो सात पुलिस कर्मी बर्खास्त कर दिए गए। इसके बावजूद इस प्रकरण में पुलिस कर्मियों के बीच ही तरह-तरह की चर्चाएं हैं। पुलिस कर्मियों का ही कहना है कि उस अफसर को पूरे प्रकरण की जानकारी थी। जितने की लूट बताई गई, पैसा उससे दोगुना ज्यादा था। कहा जा रहा है कि तगड़ी रकम को लेकर जो खेल हुआ है, उससे संबंधित आरोपियों की बातचीत की ऑडियो क्लिप भी है। उन ऑडियो क्लिप में यह स्पष्ट है कि वास्तविकता में पैसा कितना था और उसका क्या हुआ। उन ऑडियो क्लिप को जल्द ही वाराणसी से लगायत लखनऊ बैठने वाले पुलिस महकमे के शीर्ष अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करने का दावा भी किया जा रहा है।
गुजरात के पाटन जिले के मकवाना निवासी विक्रम सिंह की तहरीर के आधार पर बीते चार जून की देर रात भेलूपुर थाने में सारनाथ क्षेत्र के तिलमापुर निवासी अजीत मिश्रा और 12 अज्ञात असलहाधारियों के खिलाफ डकैती सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया था। विक्रम सिंह के अनुसार, 29 मई की रात उनके कार्यालय में आकर अजीत मिश्रा अपने सहयोगियों के साथ एक करोड़ 40 लाख रुपये लूट लिया था।
उसके कार्यालय से लूटी गई नकदी में से 92.94 लाख रुपये 31 मई को खोजवा क्षेत्र के शंकुलधारा पोखरे के समीप खड़ी एक लावारिस कार से बरामद हुए थे। इस मामले में आरोपियों से मिलीभगत और आपराधिक दुरभिसंधि का दोष साबित होने पर तत्कालीन भेलूपुर थानाध्यक्ष सहित सात पुलिस कर्मियों को शनिवार को बर्खास्त कर दिया गया। विभागीय कार्रवाई के बाद बर्खास्त किए गए पुलिस कर्मियों पर कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी गई है।