ट्रेन में बीमार बच्ची की जांच करते डॉक्टर।
ट्रेन से सफर के दौरान बुनियादी जरूरतों के लिए रेलमंत्री को किए गए ट्वीट पर तत्काल व्यवस्था मिलने की चर्चा देशभर में है। तमाम जरूरतमंदों को एक ट्वीट के बदले फौरी मदद मुहैया कराई भी गई। लेकिन शनिवार को नीतेश मिश्र को ट्वीट करने पर भी कोई राहत न मिली। उनकी पांच साल की बीमार भांजी को सात घंटे बाद दवा मिली, वह भी कैंट स्टेशन पर अफसरों से मिन्नतें करने पर।
स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस से दिल्ली से बिहार जा रहे नीतेश मिश्र की भांजी अदिति की तबीयत शनिवार की भोर में बिगड़ गई। पेट में दर्द से कराहती बच्ची को देख मां और परिवार के लोग परेशान हो उठे। ट्रेन की एस-7 बोगी में सफर कर रहे नीतेश ने परिवारीजनों को फोन पर जानकारी दी तो उन्होंने रेल मंत्री को सुबह सात बजे ट्वीट किया। कुछ घंटे बाद तक कोई जवाब या सहायता न मिलने पर नीतेश ने ट्रेन के गार्ड और टीटी को सूचना दी। फिर भी कोई मदद न मिली और बच्ची रोती-चीखती रही।
इलाहाबाद में ट्रेन आधे घंटे खड़ी रही और परिवार के लोग इलाज की दरकार में भटकते रहे पर कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद ट्रेन दोपहर एक बजे कैंट स्टेशन, वाराणसी पहुंची। यहां भी इलाज के लिए बच्ची के घर के लोग भटकते रहे। यहां जानकारी मिलने पर एनईआर के स्टेशन मास्टर और सीएल मिश्रा तथा डॉ. निलेश पहुंचे और बच्ची को देखकर जरूरी दवा दी।