जाल्हुपुर मधुकरपुर मां शीतला मंदिर के समीप चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन मंगलवार को कथाव्यास आचार्य नरदेव गिरि ने भगवान भक्त ध्रुव के जीवन प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि ध्रुव जब अपने पिता की गोद में बैठे थे, तभी उनकी सौतेली माता सुरुचि ने उन्हें गोद से उठाकर अपने पुत्र को बैठा दिया। पांच वर्ष के बालक ध्रुव यह अपमान सह न सके और रोते हुए अपनी माता सुनीति के पास पहुंचे। तब माता सुनीति ने उन्हें समझाते हुए कहा कि यदि पिता की गोद में स्थान नहीं मिला तो भगवान की गोद पाने का प्रयास करो। माता की बात सुनकर ध्रुव भगवान की प्राप्ति के लिए जंगल की ओर चल पड़े। ध्रुव ने कठोर तपस्या कर भगवान के दर्शन प्राप्त किए और भगवान की गोद में स्थान पाया। अंत में आरती हुई।