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Varanasi News: 5 दिन विश्वनाथ धाम से अन्नपूर्णा मंदिर में नहीं जा सकेंगे श्रद्धालु, अलग-अलग लगेगी कतार

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29 अक्तूबर से दो नवंबर तक बाबा और माता के भक्तों को झेलनी होगी परेशानी
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मंदिर प्रबंधन ने कहा कि पिछले तीन साल से हो रही है अलग-अलग व्यवस्था
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। पंच दीपोत्सव के दौरान बाबा विश्वनाथ और मां अन्नपूर्णा का दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी झेलनी पड़ेगी। श्रद्धालुओं को बाबा विश्वनाथ और मां अन्नपूर्णा के दर्शन के लिए अलग-अलग कतार लगानी होगी। पांच दिन तक श्रद्धालुओं को यह समस्या झेलनी होगी।
अन्नपूर्णा मंदिर प्रबंधन का कहना है कि पिछले तीन साल से श्रद्धालुओं की अलग-अलग व्यवस्था होने से यह दिक्कत हो रही है। धनतेरस पर मां अन्नपूर्णा का दर्शन पूजन और खजाना पाने के लिए देशभर से श्रद्धालु काशी पहुंचते हैं। 24 घंटे पहले से ही माता अन्नपूर्णा के मंदिर में दर्शन के लिए कतार भी लग जाती है। श्रद्धालु बांसफाटक के रास्ते ढुंढिराज गणेश होते हुए अन्नपूर्णा मंदिर पहुंचते हैं और पीछे के रास्ते से सरस्वती फाटक व डेढ़सी पुल से उनका निकास होता है।
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काशी विश्वनाथ धाम में विराजमान मां अन्नपूर्णा के दर्शन पूजन के लिए भी श्रद्धालुओं की कतार लगती है। मंदिर न्यास की ओर से पिछले तीन सालों से धाम में विराजमान मां अन्नपूर्णा के मंदिर से खजाना बांटा जाता है। ऐसे में विश्वनाथ धाम में भी धनतेरस पर भारी भीड़ होती है। भीड़ को देखते हुए श्री काशी विश्वनाथ धाम और मां अन्नपूर्णा मंदिर के लिए अलग-अलग कतार लगाई जाती है।
काशी विश्वनाथ धाम में ढुंढिराज गेट, गेट नंबर एक, सरस्वती फाटक, गंगा द्वार से श्रद्धालुओं को प्रवेश कराया जाता है। पांच दिनों तक ढुंढिराज गेट से केवल प्रवेश का इंतजाम रहता है। ऐसे में काशी विश्वनाथ धाम में बाबा और मां अन्नपूर्णा का दर्शन करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को लंबी दूरी तय करनी होगी। पहले बाबा विश्वनाथ का दर्शन करने के बाद उन्हें मां अन्नपूर्णा के दर्शन के लिए दोबारा कतार में लगना होगा। एसडीएम शंभूशरण ने बताया कि हर साल की तरह ही दर्शन पूजन के इंतजाम रहेंगे।
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अन्नपूर्णा मंदिर के प्रबंधक काशी मिश्रा ने बताया कि तीन साल से काशी विश्वनाथ मंदिर और अन्नपूर्णा मंदिर के लिए अलग-अलग कतार लग रही है। श्रद्धालु जब मां अन्नपूर्णा का दर्शन कर लेते हैं तो उनको बाबा विश्वनाथ का दर्शन करने के लिए दोबारा कतार में लगना पड़ता है। यही हाल बाबा का दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का भी होता है। अगर धाम में आने वाले श्रद्धालुओं को सीधे अन्नपूर्णा मंदिर की तरफ भेजा जाए तो श्रद्धालुओं को परेशानी नहीं होगी।
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