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Varanasi News: श्रद्धालुओं ने लिया धर्म और सनातन संस्कृति के संरक्षण का संकल्प

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वाराणसी। काशी की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा एवं सनातन संस्कृति की प्रतीक पंचकोशी परिक्रमा का भव
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काशी की पांच दिवसीय पंचक्रोशी परिक्रमा का बुधवार को समापन हुआ। यात्रा के अंतिम दिन श्रद्धालुओं ने पंचक्रोश के सभी पांचों पड़ावों की परिक्रमा पूरी की। इसके बाद वे पांचवें पड़ाव कपिलधारा पहुंचे, जहां उन्होंने दर्शन-पूजन करने के साथ जौ विनायक के दर्शन कर अपने आध्यात्मिक अनुष्ठान को संपन्न किया। कपिलधारा में पूजन के बाद सभी श्रद्धालु क्रूज के माध्यम से मणिकर्णिका घाट पहुंचे। यहां उन्होंने अपनी यात्रा की सफलता और संकल्प पूर्ति के लिए पूजा-पाठ किया। इसके बाद श्रद्धालुओं का दल बाबा विश्वेश्वर (काशी विश्वनाथ) के दरबार पहुंचा, जहां सबने विधिवत दर्शन-पूजन कर बाबा के चरणों में मत्था टेका और विश्व के कल्याण की कामना की। बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने के बाद सभी श्रद्धालुओं ने कैलाश मठ में स्वामी जितेंद्र आनंद सरस्वती का चरण पखारकर अभिनंदन किया और उनका आशीर्वाद लिया। मठ में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए स्वामी आशुतोष आनंद गिरी ने कहा कि काशी केवल एक नगर नहीं, बल्कि मोक्ष और अध्यात्म की दिव्य भूमि है जो तीन खंडों में विद्यमान है। पंचक्रोशी परिक्रमा वास्तव में पंच महादेवों की आराधना का महान आध्यात्मिक मार्ग है, जो मनुष्य को आत्मशुद्धि, सेवा और त्याग की प्रेरणा देता है। पंचक्रोशी परिक्रमा में तकरीबन 1050 श्रद्धालु शामिल हुए।
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