बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल की इमरजेंसी में 20 सितंबर को हुई पिटाई के विरोध में आईएमएस निदेशक कार्यालय पर जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल पांचवें दिन सोमवार को भी जारी रही। जहां बीएचयू प्रशासन और पुलिस प्रशासन के साथ बैठक में इमरजेंसी में सुरक्षा देने, पुलिस हेल्पडेस्क स्थापित करने की मांग मान ली गई है, वहीं घटना के पांच दिन बाद भी हमलावरों की गिरफ्तारी न होने से जूनियर डॉक्टर नाराज हैं।
इधर हड़ताल जारी रहने से मरीजों का ज्यादा नुकसान हो रहा है। बड़ी संख्या में ओपीडी में डॉक्टर को न दिखा पाने के साथ ही मरीजों का ऑपरेशन भी नहीं हो पा रहा है। उन्हें हड़ताल के बाद आने बात कही जा रही है। सोमवार को भी पंजीकरण काउंटर, पैथालॉजी से जुड़ी जांच काउंटर सहित कई जगहों पर ओपीडी में सन्नाटा छाया रहा। इस वजह से कई मरीज बिना इलाज घर चले गए।
इमरजेंसी गेट पर बनी पुलिस हेल्प डेस्क
बीएचयू अस्पताल की इमरजेंसी में 20 सितंबर की घटना के बाद यहां पुलिस हेल्प डेस्क बनाई गई है। सोमवार को यहां एक दारोगा और तीन सिपाही बैठे थे। साथ ही बीएचयू प्रॉक्टोरियल बोर्ड की ओर से पांच-छह सुरक्षा कर्मी भी तैनात रहे, जो इमरजेंसी में अंदर आने जाने वालों की निगरानी करते रहे।
नहीं मिले चीफ प्रॉक्टर, इमरजेंसी पहुंचे जूनियर डॉक्टर
जूनियर डॉक्टर शाम करीब तीन बजे आईएमएस निदेशक कार्यालय से मार्च निकालकर बीएचयू में चीफ प्रॉक्टर से मिलने उनके कार्यालय पहुंचे। यहां चीफ प्रॉक्टर से उनकी मुलाकात नहीं हुई। इसके बाद इमरजेंसी पहुंचे। यहां हमलावरों की गिरफ्तारी न होने के विरोध में नारेबाजी कर न्याय दिलाने की बीएचयू और पुलिस प्रशासन से मांग की। उनका कहना था कि गिरफ्तारी और निलंबन न होने तक वह काम पर लौटने वाले नहीं है।
सोमवार की शाम फिर जूनियर डॉक्टरों के साथ निदेशक प्रो.एसके सिंह, ट्रॉमा सेंटर प्रभारी प्रो.सौरभ सिंह आदि की मौजूदगी में बातचीत हुई। उनकी अधिकांश मांगे मान ली गई हैं, जिससे वह सहमत हैं। उम्मीद है कि जल्द ही काम पर लौट आएंगे। अस्पताल आने वाले मरीजों की हर संभव बेहतर सेवा की जा रही है।-प्रो.अंकुर सिंह, कार्यवाहक एमएस, बीएचयू अस्पताल