नाथेराम के शपथ पत्र के आधार पर तत्कालीन लेखपाल की रिपोर्ट के आधार पर मिर्जापुर के तहसीलदार सदर ने कृष्णकांत को वारिस प्रमाण पत्र जारी कर दिया। उसी प्रमाण पत्र के आधार पर सुमित्रा देवी के मृतक आश्रित के तौर पर कृष्णकांत बेसिक शिक्षा विभाग में समायोजित हुआ। जांच में पाया गया कि कृष्णकांत न तो सुमित्रा देवी का बेटा है और न विधिक वारिस है।
इंस्पेक्टर सुनीता सिंह के अनुसार कृष्णकांत को मृतक आश्रित के तौर पर बेसिक शिक्षा विभाग में समायोजित कराने में तत्कालीन लेखपाल स्व. शेषमणि और बेसिक शिक्षा अधिकारी स्व. दयाशंकर सिंह की अहम भूमिका रही है। तत्कालीन लेखपाल व बेसिक शिक्षा अधिकारी की कृष्णकांत व नाथेराम से मिलीभगत थी। यह सब छल की नियत से गलत तरीके से लाभ पाने के लिए किया गया था।