आठ घंटे के इंतजार के बाद पांच फुट की दूरी से बाबा विश्वनाथ के दर्शन हुए तो श्रद्धालुओं की थकान दूर हो गई। बाबा को फूल-माला, प्रसाद और जल तो चढ़ाया, लेकिन मन में मलाल रह गया कि बाबा को स्पर्श नहीं कर सके। सावन के चौथे सोमवार को दोपहर तीन बजे तक दो लाख से अधिक शिवभक्तों ने बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक किया।
सावन के चौथे सोमवार को मंगला आरती के साथ भोर में तीन बजे से ही बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन का सिलसिला शुरू हो गया। आधी रात के बाद से ही शिवभक्त दर्शन-पूजन और जलाभिषेक के लिए कतारबद्ध होने लगे थे। मंगला आरती के बाद बाबा विश्वनाथ के मंदिर के कपाट जैसे ही खुले, श्रद्धालुओं का जोश देखते बना। रेड कार्पेट पर चलकर शिवभक्त हर-हर महादेव का जयकारा लगाते हुए धाम में प्रवेश कर रहे थे।
बाढ़ और सुरक्षा कारणों से तीन गेट बंद होने के कारण श्रद्धालुओं को तीन गेट से ही प्रवेश मिल रहा था। मंदिर से पांच किलोमीटर तक का इलाका पूरी तरह से भगवामय नजर आ रहा था। चारों ओर हर-हर महादेव, बोल बम का नारा है बाबा एक सहारा है... का जयघोष गूंज रहा था। दोपहर तीन बजे तक दो लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन किया।