जिला जेल के पूर्व अधीक्षक आशीष तिवारी बंदियों और जेल के ही कुछ अधिकारियों की साजिश का शिकार हो गए। बवाल के समय बंदियों ने जेल अधीक्षक आशीष तिवारी और डिप्टी जेलर अजय राय पर एक साथ हमला किया था। डिप्टी जेलर को उसी समय अस्पताल ले जाया गया लेकिन जेल अधीक्षक की सुध नहीं ली गई। उन्हें बंदियों के बीच अकेला छोड़ दिया गया। यहां तक कि सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन की ओर से उन्हें मुहैया कराए गए दोनों गनर भी खिसक लिए। इस पूरे घटनाक्रम से खुद डीआईजी जेल एसके श्रीवास्तव भी हैरान हैं। जिला प्रशासन और पुलिस के उच्चाधिकारियों की अब तक की छानबीन में भी ऐसे ही तथ्य सामने आ रहे हैं।
जब डिप्टी जेलर को अस्पताल ले जाया जा रहा था तो जेल अधीक्षक को क्यों छोड़ दिया गया, इस सवाल के जवाब का इंतजार खुद डीआईजी जेल को भी है। बता दें कि बंदियों के हमले के दौरान घायल हुए आशीष तिवारी ने 2012 में जिला जेल अधीक्षक का कार्यभार संभाला था। वह अपनी सख्त छवि के लिए जाने जाते हैं। कुछ जेल अधिकारी उनसे खुश थे तो ज्यादातर उनसे नाखुश रहते थे। मनमाफिक सुविधा न मिलने से अधिकतर बंदी भी उनसे नाराज थे। उन्होंने सख्ती से मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी।
शनिवार को बंदियों ने पेशी पर जाते समय सबसे पहले डिप्टी जेलर अजय राय और फिर अधीक्षक आशीष तिवारी पर हमला किया था। दोनों को सिर में चोट आई। हंगामे के बीच ही अजय राय को अस्पताल ले जाया गया लेकिन उनसे वरिष्ठ अधिकारी आशीष तिवारी को अस्पताल नहीं ले जाया गया। चर्चा यह भी रही कि जेल अधीक्षक को बंदियों के बीच अकेला छोड़ दिया गया और उन्हें बंदी अपनी बैरक में उठा ले गए। डीएम राजमणि यादव ने घटना की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं। वहीं जेल प्रशासन भी इसकी जांच करा रहा है।
डीआईजी जेल एसके श्रीवास्तव रविवार को पूरे दिन जेल में ही रहे। उनका कहना था कि बड़े अचरज की बात है कि घायल डिप्टी जेलर को अस्पताल ले जाया गया लेकिन जेल अधीक्षक को नहीं ले जाया जा सका। खतरे के मद्देनजर ही एसएसपी ने उन्हें 24 घंटे के लिए दो गनर उपलब्ध कराए थे लेकिन उन्होंने भी कुछ नहीं किया। घटना की तह तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।