पुलिस की सतर्कता, सर्विलांस और मुखबिरों के जाल के बावजूद बनारस में रंगदारी वसूलने के खेल पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। वाराणसी जेल में निरुद्ध और जमानत पर छूटे बदमाश बेखौफ तरीके से बिल्डरों, उद्यमियों व डॉक्टरों से रंगदारी वसूल रहे हैं और पुलिस तमाशबीन बन कर रह जा रही है।
बीते 14 सितंबर को दशाश्वमेध क्षेत्र के पतालेश्वर मुहल्ले में 50 हजार के इनामी बदमाश रईस बनारसी और राकेश अग्रहरि एक-दूसरे की पिस्टल की गोली का निशाना बने, इसकी अहम वजह दालमंडी के एक बिल्डर से रंगदारी वसूलने को लेकर दोनों के बीच की रार थी। इन सबके बावजूद पुलिस इस संबंध में कोई ठोस उपाय नहीं कर पा रही है।
आदमपुर थाना क्षेत्र निवासी व्यापारी से बीते हफ्ते गाजीपुर जेल में निरुद्ध एक बदमाश ने रंगदारी मांगी थी। व्यापारी की शिकायत पर पुलिस ने सर्विलांस की मदद से तफ्तीश की तो इसकी तस्दीक हुई। यह प्रकरण अभी शांत नहीं हुआ था कि तब तक डीरेका के एक ठेकेदार से जमानत पर बाहर चल रहे बदमाश द्वारा रंगदारी मांगे जाने का मामला सामने आया।
इसी बीच बदमाश सलमान उर्फ अन्ना द्वारा दालमंडी के व्यापारी से रंगदारी मांगने का मामला सामने आया था। इससे पहले जिला जेल से बदमाश संतोष शुक्ला द्वारा लक्सा के व्यापारी से रंगदारी मांगी गई। संतोष शुक्ला की लगातार शिकायतों के बाद उसे दूसरे जनपद की जेल में शिफ्ट कर दिया गया। इसी तरह लखनऊ जेल से पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति के गुर्गे द्वारा जंगमबाड़ी निवासी व्यापारी से रंगदारी मांगी गई।
वहीं, शिवपुर क्षेत्र निवासी चिकित्सक से रंगदारी मांगे जाने के मामले का पुलिस अब तक खुलासा नहीं कर सकी है। इस संबंध में एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि प्राप्त शिकायतों पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही इस संबंध में क्राइम ब्रांच को अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए बदमाशों के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।