यूपी के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर और गाजीपुर के डीएम के बीच सुर्खियां बनी हुई हैं। दोनों के बीच तल्खी की शुरुआत एक छोटी सी घटना हुई। कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के प्रतिनिधि और भासपा के जिलाध्यक्ष और उसके भाई द्वारा कुछ दिन पहले जमीन की पैमाइश करने गए चकबंदी कानूनगो के साथ मारपीट की घटना हुई थी।
इस मामले में जिलाधिकारी के निर्देश पर मंत्री प्रतिनिधि के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद कैबिनेट मंत्री औैर जिलाधिकारी के बीच तल्खी बढ़ गई है। डीएम के निर्देश पर हुई कार्रवाई से नाराज मंत्री ने मोर्चा खोल दिया है।
जबकि सीएम के आदेश पर डीएम ने चकबंदी अधिकारियों की टीम बनाकर जमीन की पैमाइश कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था। एक माह पूर्व बरेसर थाना क्षेत्र के मनीरामपुर गांव निवासी नरीजन राजभर ने सीएम के जनता दरबार में पहुंचकर कैबिनेट मंत्री के प्रतिनिधि और भासपा जिलाध्यक्ष रामजी राजभर द्वारा वर्षों से कब्जा की गई जमीन को खाली कराने और न्याय दिलाने की गुहार लगाई थी।
सीएम ने चकबंदी आयुक्त को पैमाइश कराकर मामले का निपटारा करने का निर्देश दिया था। चकबंदी आयुक्त ने डीएम संजय खत्री को पत्र के जरिये समस्या का जल्द समाधान करने निर्देश दिया था। इसके बाद डीएम ने चकबंदी अधिकारियों की टीम बनाकर पैमाइश करने तथा जमीन कब्जा मुक्त कराने का निर्देश दिया था।
आरोप है कि 17 जून को सहायक चकबंदी अधिकारी, कानूनगो और लेखपाल जब जमीन की पैमाइश करने पहुंचे तो भासपा के जिलाध्यक्ष और उसके भाई राजनेत राजभर ने कानूनगो के साथ मारपीट और गाली-गलौज करते हुए भगा दिया था।
सरकारी कर्मचारियों ने जब थाने में तहरीर दी तो पुलिस जांच कर कार्रवाई करने की बात कहकर टाल-मटोल करने लगी। इसके बाद मामला डीएम के संज्ञान में आया और उन्होंने निर्देश दिया, तब पुलिस सक्रिय हुई। मामले के चार दिन बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया।
पार्टी के जिलाध्यक्ष पर मुकदमा दर्ज होने की जानकारी होते ही प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने डीएम के खिलाफ 12 दिन बाद मोर्चा खोल दिया। सूत्रों के अनुसार कैबिनेट मंत्री जिला प्रशासन पर मुकदमा दर्ज नहीं करने का दबाव बना रहे थे, लेकिन सरकारी कर्मचारी के साथ हुए दुर्व्यवहार और मारपीट को देखते हुए डीएम ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया था।