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पिता ने तीन साल की बच्ची को गंगा में फेंका

Tue, 12 Jan 2016 01:55 AM IST
ब्यूरो, वाराणसी अमर उजाला
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आर्थ्क  तंगी और पारिवारिक विवाद की वजह से रामनगर के सूजाबाद निवासी धर्मेंद्र ने सोमवार को दिन में करीब साढ़े ग्यारह बजे अपनी तीन साल की बेटी ज्योति को राजघाट पुल से गंगा में फेंक दिया।
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संयोग रहा कि पास में ही मल्लाह रमेश साहनी चुंबक की मदद से गंगा से पैसे निकाल रहा था। उसने किसी तरह मासूम को बचाकर बाहर निकाला। उसे मंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
 पुलिस ने धर्मेंद्र को गिरफ्तार कर लिया है।
सोमवार को दिन में किसी पैदल राहगीर ने एक मासूम बच्ची को गंगा में फेंक दिया। इसके बाद वह भाग निकला। कुछ ही देर में लोगों की भीड़ लग गई।
आदमपुर निवासी रमेश ने उसे बाहर निकाला और पुलिस की मदद से उसे अस्पताल ले जाया गया। मासूम की पसलियों में काफी चोट आई थी। वह दर्द से कराहते हुए सिर्फ मां-मां चिल्ला रही थी।
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शाम करीब सात बजे रामनगर के सूजाबाद निवासी सुनीता अस्पताल पहुंची और खुद को मासूम की मां बताते हुए उसे गले से गला लिया। ज्योति ने भी मां को पहचान लिया। वह लोगों के घर बर्तन साफ करती है।
 पहचान उजागर होने के बाद पुलिस भी सक्रिय हुई। धर्मेंद्र की तलाश की जाने लगी लेकिन वह घर पर नहीं मिला। उसे कोनिया स्थित एक बेकरी की दूकान से पकड़ा गया। वह बेकरी में काम करता था।
कड़ाई से पूछताछ करने पर उसने बताया कि आर्थिक तंगी और पारिवारिक विवाद के चलते उसने बेटी को गंगा में फेंका था। पुलिस उसे गिरफ्तार कर रामनगर थाने ले गई। वह विक्षिप्तों जैसी हरकतें कर रहा था।
उसके परिवार में पत्नी और दो बेटियां है। बड़ी बेटी मधु पांच साल की है। वहीं बच्ची की मां सुनीता का कहना है कि वह सुबह बर्तन धोने गई थी। पति और दोनों बेटियां घर पर ही थी।
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घर लौटने पर उसने पति से ज्योति के बारे में पूछा लेकिन उन्होंने कुछ नहीं बताया।
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