गैंगरेप मामले में गिरफ्तार पूर्व कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के तीन साथियों का विकास वर्मा, पिंटू सिंह और ओमप्रकाश तिवारी का सोनभद्र जिले के खनन कारोबार में खासा दखल था। विकास के जिम्मे वीआईपी सिंडिकेट चलवाने की तो पिंटू सिंह प्रॉपर्टी जबकि ओमप्रकाश तिवारी बालू और पत्थर की अवैध खदानों में पार्टनर बन बैठे।
मंत्री का करीबी होने के नाते इन लोगों ने जहां चाहा, पोकलेन मशीनों से बालू का अवैध खनन कराया। इनमें जिले के कुछ बालू के बड़े ठेकेदार और कुछ चर्चित नेता भी शामिल रहे। अमर उजाला ने समय-समय पर सिलसिलेवार अवैध बालू साइट का खुलासा किया।
इसके बाद अवैध बालू साइट संचालकों के खिलाफ न सिर्फ कार्रवाई हुई बल्कि कइयों के खिलाफ अवैध खनन का मुकदमा भी दर्ज हुआ।
सपा सरकार बनने के एक साल बाद गायत्री ने लखनऊ में खनन अधिकारी और सर्वेयरों की बैठक बुलाकर विकास वर्मा और पिंटू सिंह का परिचय कराया था।
अधिकारियों को बताया गया कि पहले के सभी सिंडिकेट अब बदल दिए जाएंगे। सिंडिकेट का काम अब विकास वर्मा और पिंटू सिंह देखेंगे। इसके बाद 2014 में यहां वीआईपी सिंडिकेट बदल दिया गया। पत्थर और बालू से रायल्टी के अलावा अतिरिक्त रुपये सीधे लखनऊ में विकास वर्मा के पास पहु्चाए जाने लगे।
बताते हैं कि वीआईपी वसूली से अकेले हर माह एक करोड़ रुपये विकास वर्मा को जाते थे। बाकी में शासन-प्रशासन से लेकर अन्य लोग शामिल रहते थे। 2015 में पिंटू सिंह बालू साइटों पर कब्जे के लिए अपने साथ ओमप्रकाश तिवारी को सोनभद्र ले आया।
ओमप्रकाश ने राबर्ट्सगंज में किराये का एक मकान लिया। यहीं से अवैध बालू साइट का संचालन शुरू हो गया।
अमर उजाला की खबर का पड़ा था असर
गायत्री प्रसाद प्रजापति
- फोटो : amar ujala
इसी बीच अमर उजाला ने सेंक्चुअरी एरिया में बालू की छह साइट के संचालन की खबर प्रकाशित की। इस पर टीम ने छापा मारकर एक पोकलेन मशीन को सीज कर दिया। कुछ दिन बीतने के बाद फिर से खनन माफिया की मिलीभगत से अवैध बालू साइट चलने लगी।
इस बार पूर्वांचल के माफिया और कई माननीय भी जुड़ गए। बताते हैं कि ओमप्रकाश के दबाव में पूरा खनन विभाग रहता था। सेक्चुअरी एरिया में बालू की साइटें दिन में ही चलती थीं। इस मामल में दो के खिलाफ अवैध खनन का केस दर्ज हुआ।
हाईकोर्ट की ओर से जिले में बालू खनन पर रोक लगाने के बाद से ओमप्रकाश का यहां से बोरिया-बिस्तर बंध गया, मगर विकास और पिंटू सिंह चुनाव से पूर्व तक खनन बेल्ट में दखल बनाए रहे।