टेंडर में बाधा पैदा करने वालों को बस में पकड़कर ले जाती पुलिस।
डीरेका के सिविल वर्क से जुड़े ढाई करोड़ रुपये के टेंडर को हथियाने की होड़ में मंगलवार को दो गुट आमने-सामने आ गए। वर्चस्व की लड़ाई में हंगामा और झड़प के बीच खुलेआम एक-दूसरे को देख लेने की धमकी दी गई। इस दौरान कई डीरेका की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए असलहाधारी प्रशासनिक भवन तक पहुंच गए। हालात बेकाबू होते देख आरपीएफ ने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी।
मंडुवाडीह पुलिस और डीरेका के सुरक्षा तंत्र ने 53 लोगों को शांति भंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अफरातफरी के बीच असलहाधारी चहारदीवारी फांद कर भाग निकले। पकड़े गए आरोपियों में अधिकतर हाई स्कूल और इंटर के छात्र हैं और उन्हें रैली में शामिल होने के नाम पर यहां बुलाया गया था। सूत्रों की मानें तो यहां किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की पूरी तैयारी थी।
डीरेका के प्रशासनिक भवन स्थित सिविल विभाग में सुबह 10 बजे टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई थी। दोपहर लगभग दो बजे टेंडर बॉक्स के पास दो गुटों में झड़प शुरू हो गई। मौके पर मौजूद रेलवे पुलिस ने झड़प कर रहे लोगों को प्रशासनिक भवन से बाहर निकाल दिया। इसके बाद दोनों गुटों ने फोन कर अपने-अपने समर्थक बुला लिए।
दोनों पक्षों की तरफ से बड़ी संख्या में लोग डंडे, हॉकी लेकर पहुंच गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इनमें से कई असलहों से लैस थे। दोनों गुटों की गरमागरमी के बीच हालात बिगड़ते देख आरपीएफ ने पुलिस को सूचना दी और प्रशासनिक भवन का मुख्य गेट बंद कर दिया। कुछ ही देर में मौके पर पहुंची मंडुवाडीह पुलिस और आरपीएफ ने घेरेबंदी कर भाग रहे लोगों को पकड़ लिया। पकड़े गए नाबालिगोें को पुलिस ने छोड़ दिया। बाकी 38 लोगों को मंडुवाडीह पुलिस और 15 को आरपीएफ ने मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया।