जांच कमेटी ने दोनों डाटा मैच कर शिवमुनी को फर्जी घोषित कर दिया। इस पर शिक्षिका को नोटिस जारी कर जांच कमेटी के समक्ष बुलाया गया लेकिन वो नहीं आई। बीएसए देवेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि जांच कमेटी द्वारा स्नातक की मार्कशीट में अंतर की पुष्टि कर देने के बाद सत्यापन के लिए पत्र विश्वविद्यालय को भेजा गया, लेकिन वहां से जवाब नहीं आया।
इस पर विभाग से एक व्यक्ति को जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल पीजी कालेज बाराबंकी पर सत्यापन के लिए भेजा गया जहां पुष्ट हुआ कि अंकपत्र पर अंकित अनुक्रमांक पर सरिता देवी पुत्री गोपाल चौरसिया का नाम अंकित है। कु शिवमुनी यादव पुत्री बसंत यादव का अंकपत्र फर्जी घोषित हुआ।
महाविद्यालय से सत्यापन रिपोर्ट मिलने पर बीएसए ने कु शिवमुनी यादव की नियुक्ति को नियुक्ति तिथि से ही निरस्त कर दिया और वित्त एवं लेखाधिकारी और खंड शिक्षाधिकारी बिलरियागंज को निर्देशित किया कि शिवमुनी द्वारा आहरित धनराशि की रिकवरी करना सुनिश्चित करें।