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15 दिन में सौंपेंगे बवाल की रिपोर्ट

Wed, 06 Apr 2016 02:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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जिला कारागार में शनिवार को साढ़े सात घंटे तक हुए बवाल की जांच कर डीआईजी जेल एसके श्रीवास्तव 15 दिन में प्रदेश सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। सरकार का निर्देश है कि दोषियों को चिह्नित करने के साथ ही बवाल की वजह रिपोर्ट में स्पष्ट की जाए। इस क्रम में डीआईजी जेल ने कारागार कर्मियों के बयान दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही, बवाल से संबंधित वीडियो और फोटो एकत्र किए जा रहे हैं। बंदियों का भी बयान दर्ज किया जाएगा। उधर, जिला जेल में हुए बवाल को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में जनहित याचिका भी दाखिल की गई है। जिस पर बुधवार को सुनवाई होगी।
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बवाल के दौरान जिला जेल शनिवार को सुबह नौ से शाम साढ़े चार बजे तक बंदियों में कब्जे में रही। इस दौरान जेल अधीक्षक आशीष तिवारी, डिप्टी जेलर अजय राय सहित छह जेल कर्मियों को बंदियों ने घायल कर दिया। साथ ही, जेल अधीक्षक को बंधक बना लिया। बंदियों की मांग पर पहुंचे सपा नेताओं ने बवाल शांत कराने के साथ जेल अधीक्षक को मुक्त कराया था। इसके 30 घंटे बाद रविवार की रात भी जेल की बैरक में मारपीट और आगजनी हुई। प्रदेश सरकार ने मामले की जांच डीआईजी जेल को सौंपी है। जेल अधीक्षक के तबादले के बाद अब तक जेलर विजय कुमार राय को डीआईजी जेल कार्यालय से संबद्ध कर बवाली के तौर पर चिह्नित 18 बंदियों को पूर्वांचल की अलग-अलग जेलों में स्थानांतरित किया जा चुका है। मंगलवार को भी बवाली बंदियों को चिह्नित करने का काम जारी रहा। साथ ही, ऐसे बंदीरक्षक भी चिह्नित किए जा रहे हैं जिनकी वजह से बवाल की स्थिति पैदा हुई। डीआईजी जेल ने बताया कि अगले 15 दिन में जांच पूरी कर सरकार को रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। बयान दर्ज कर साक्ष्यों को एकत्र किया जा रहा है।


उधर, मंगलवार को जिला जेल का माहौल सामान्य रहा और बंदियों से उनके घरवालों की मुलाकात जारी रही। फिलहाल जिला कारागार में डीआईजी जेल कैंप किए हुए हैं। जबकि बाहर पीएसी और पुलिस के जवान बड़ी संख्या में तैनात हैं। जेल कर्मियों के बीच बवाल और उसके बाद शुरू हुई जांच और कार्रवाई को लेकर चर्चाएं जारी रहीं।
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 लगातार दो दिनों तक जेल में हुए बवाल की मजिस्ट्रेटी जांच के दायरे में बंदियों, सपा नेताओं के अलावा वे सभी अधिकारी हैं जो घटना के समय वहां मौजूद थे। डीएम ने यह जांच सिटी मजिस्ट्रेट एसएस शुक्ल को सौंपी है। उन्हें 14 दिनों के भीतर रिपोर्ट देने को कहा है। जांच अधिकारी ने छानबीन शुरू कर दी है। बुधवार को लखनऊ से लौटने के बाद वे सभी पक्षों का बयान लेंगे। यह जांच जेल की आंतरिक व्यवस्था से जुड़ी है, लिहाजा इसमें आम जनता का पक्ष लेने के लिए नोटिस जारी नहीं किया जाएगा। नोटिस केवल घटना के वक्त मौजूद अधिकारियों, नेताओं और बंदियों के लिए जारी होगा। बंदियों का बयान लेने जांच अधिकारी खुद जिला जेल जाएंगे। जिस समय घटना हुई थी, वहां मौके पर डीएम, डीआईजी, डीआईजी जेल, एडीएम सिटी, एसपी सिटी, एसपी प्रोटोकाल, तत्कालीन जेल अधीक्षक, जेलर, डिप्टी जेलर सहित पुलिस-प्रशासन के कई अधिकारी थे। जांच अधिकारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती सीनियर अधिकारियों और सपा से जुड़े नेताओं का बयान लेना है। इस बारे में सिटी मजिस्ट्रेट ने बुधवार को लखनऊ से लौटने के बाद वह संबंधित लोगों का बयान लेंगे।
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