भ्रष्टाचार के आरोप में जिला जेल में बंद निलंबित एआरटीओ आरएस यादव पर आखिरकार जेल प्रशासन को शिकंजा कसना पड़ा है। जेल अस्पताल में आरएस के आराम फरमाने का खुलासा होने के बाद रविवार को जिला प्रशासन की औचक छापेमारी की आशंका से जेल प्रशासन में खलबली मच गई।
तत्काल आरएस को जेल अस्पताल से उसकी बैरक नंबर 11 में शिफ्ट कर दिया गया। इतना ही नहीं, बंदीरक्षकों को भी एलर्ट किया गया कि आरएस को लेकर किसी तरह की ढिलाई न बरती जाए।
सूत्रों की मानें तो परिवहन माफियाओं की सरपरस्ती और रुपये के बूते जिला जेल में आरएस को मनमाफिक सुविधाएं मिलने की जानकारी शासन स्तर तक पहुंच गई है। दरअसल, पूर्वांचल के परिवहन माफियाओं की मदद से जिला कारागार में आरएस यादव ने बंदियों के बीच अपना अलग रसूख बनाया।
भ्रष्टाचार से कमाए गए रुपयों की बदौलत जेल की चहारदीवारी में वह मनमाफिक तरीके से रहने लगा था। मामला उजागर होने पर जेल प्रशासन के भी कान खड़े हो गए हैं। जेल सूत्रों के अनुसार आरएस यादव के लिए बाहर से लाए जा रहे मिनरल वॉटर, नाश्ता और भोजन पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।
साथ ही, आरएस के मुलाकातियों पर भी पैनी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। उधर, जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने बताया कि आरएस मामले में जेल के अधिकारियों से जवाब तलब किया जाएगा। सामान्य बंदियों की ही भांति जेल में आरएस यादव को भी रखा जाएगा।
आरएस की वायरल फोटो का सच आखिर क्या
जेल अस्पताल में बेड पर लेटे आरएस यादव की तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई है। इसे लेकर जेल प्रशासन भी सकते में है। सबसे अहम यह कि प्रतिबंध के बाद भी चहारदीवारी के अंदर यह तस्वीर कैसे खींची गई।