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जौनपुर: सराफा डकैती के मामले में इंस्पेक्टरों के निलंबन पर उठे सवाल

Fri, 08 Nov 2019 08:06 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जौनपुर
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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जौनपुर एसपी कार्यालय के पीछे सराफा कारोबारी के शोरूम से हुई एक करोड़ से अधिक की डकैती के मामले में एसपी ने सर्विलांस प्रभारी ओम नारायण सिंह और स्वाट प्रभारी विरेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया है। एसपी की इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहा है।

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पुलिस विभाग में दबी जुबान से लोग चर्चा कर रहे हैं कि फैंटम के सिपाही, डायल 100 के सिपाही और चौकी प्रभारी पर आखिर क्यों नहीं कार्रवाई हो रही है। एसपी ने ऐेसे इंस्पेक्टर को भी निलंबित कर दिया जो वाराणसी में अक्तूबर के अंतिम सप्ताह में बदमाशों के हमले में घायल होकर बीएचयू में इलाज करा रहा है।

एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पुलिस अधिकारियों के अच्छे पर्यवेक्षण न होने के कारण एक करोड़, 5 लाख 80 हजार की डकैती के मामले में कोई प्रगति नहीं हो पा रही है। इस घटना में परोक्ष और अपरोक्ष रूप से शामिल दो बदमाशों पर आईजी ने 50-50 हजार का ईनाम घोषित किया है। वैसे तो इन पर इनाम दूसरे केस में भी घोषित किया गया है। लेकिन सराफा डकैती से भी इसे जोड़कर देखा जा रहा है।

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पुलिस अधिकारियों के पर्यवेक्षण और प्लानिंग का अभाव ही है कि वाराणसी के जंसा थाना क्षेत्र में दबिश देने गई जौनपुर पुलिस बदमाशों ने हमला कर दिया। उस हमले में इंस्पेक्टर सर्विलांस प्रभारी ओमनारायण सिंह, एसआई बालेंदु यादव और दो सिपाहियों को गंभीर चोटे आई थी। सभी अपना अपना इलाज करा रहे हैं। इसी बीच एसपी कार्यालय के पीछे डकैती हो गई।

डकैती की घटना के बाद एडीजी से लेकर आईजी ने जौनपुर में खुलासे के लिए डेरा डाला। प्रदेश के डीजीपी ने भी वर्कआउट करने के लिए सख्त निर्देश दिए। सूत्रों की मानें तो घटना के बाद एसपी ने सर्विलांस प्रभारी  इंस्पेक्टर ओमनारायण सिंह को फोन किया।

उन्होंने बताया कि वाराणसी के जंसा थाना क्षेत्र के हरसोस गांव में गिरफ्तारी के विरोध में जो हमला हुआ था उसमें पत्थर मेरे सीने पर लगा है। बीएचयू के डाक्टर ने 21 दिन तक आराम करने की सलाह दी है। वाराणसी में मैं अपना इलाज करा रहा हूं। सांस लेने में दिक्कत है और दर्द भी है।

सर्विलांस प्रभारी ने यह भी बताया कि 31 अक्तूबर को इसकी लिखित सूचना आप को और आरआई को एक्सरे रिपोर्ट के साथ दी जा चुकी है। बावजूद इसके आप द्वारा ऐसा सवाल पूछा जा रहा है। सच्चाई जो भी हो इसके बाद 6 नवंबर को एसपी ने कारण बताओ नोटिस सर्विलांस प्रभारी को जारी किया। कहा कि डकैती की घटना में प्रभारी सर्विलांस होने के नाते आप का यह दायित्व है कि अहम भूमिका निभाते हुए प्रगति से प्रतिदिन मुझे अवगत करायें।

एसपी ने कहा कि अबतक कौन-कौन सी कार्रवाई अमल में लाई गई है, आप द्वारा कौन से सार्थक प्रयास किए गए हैं इस संबंध में स्पष्टीकरण देना सुनिश्चित करें। इसके एक दिन बाद ही एसपी द्वारा निलंबित किया जाना चर्चा का विषय बना हुआ है।
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उधर एसपी रविशंकर छवि का कहना है कि तीन नवंबर को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि सर्विलांस पद पर होने के नाते यह दायित्व है कि अहम भूमिका निभाते हुए घटना के वर्कआऊट के लिए प्रयास करें। लेकिन इंस्पेक्टर ओमनारायण सिंह लगातार गैरहाजिर रहते हुए मनमाना रवैया अपना रहे थे। इस वजह से उन्हें निलंबित कर दिया गया।

प्रश्न यह है कि घटना स्थल से पचास मीटर दूरी पर पुलिस चौकी है। वहां से पचास मीटर जेल गेट पर डायल 100 गाड़ी खड़ी रहती है। पिकेट ड्यूटी पर सिपाही तैनात रहते हैं। क्या घटना में उनकी नाकामी नहीं मानी जा सकती।
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