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अमर उजाला की खबर का असर, सरकार की जमीन पर फर्जी दावेदार, कब्जा करने वालों को पुलिस ने खदेड़ा

Thu, 26 Sep 2019 01:02 PM IST
गीतार्जुन गौतम शशांक मिश्र, अमर उजाला, वाराणसी
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राय साहब बगीचे के पास मौजूद पुलिस। - फोटो : अमर उजाला
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शहर के बीच साढ़े चार एकड़ में फैले राय साहब के बगीचे का अधिग्रहण शासन ने वर्ष 1998 में किया। खसरा और खतौनी में राज्य सरकार का नाम भी दर्ज हो गया। इसके 20 साल बाद पांच से 11 सितंबर के बीच फर्जीवाड़ा कर करोड़ों रुपये की जमीन के बैनामे की साजिश रची गई।

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उधर, बुधवार को अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल के निर्देश पर सरकारी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश करने वालों को पुलिस ने खदेड़ दिया। पांडेयपुर स्थित इस बेशकीमती जमीन पर पुलिस तैनात कर दी गई है।

विकास प्राधिकरण की जमीन का 13 सितंबर 2019 को बनारस की रघुकुल कंस्ट्रक्शन और मुंबई की दादू डेवलपर्स ने बैनामा करा लिया था। इस जमीन के पते पर 25 सितंबर को कार्यक्रम आयोजित कर कागजी कब्जा साबित करने की कोशिश भी की गई। सूत्रों की मानें तो पांच सितंबर को जमीन पर दावा करने वाली एक महिला की मौत हो गई।

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इसके बाद आननफानन फर्जीवाड़े की योजना बनाई गई। 12 सितंबर को ई-स्टांप के लिए रुपये जमा कराए गए और 13 सितंबर को इसका सट्टा करा लिया गया। सबसे अहम बात यह है कि इस जमीन पर न्यायालय ने सरकार के पक्ष में भी हर बार फैसला दिया था और विकास प्राधिकरण इस पर काबिज था। बावजूद इसके मिलीभगत कर बैनामा कराया गया। 

टेंट लगाकर कार्यक्रम की थी तैयारी
मंगलवार देर रात और बुधवार सुबह कमिश्नर के निर्देश पर कैंट पुलिस के साथ विकास प्राधिकरण ने अवैध कब्जे की कोशिश करने वालों को खदेड़ा। यहां टेंट आदि लगाकर किसी कार्यक्रम के आयोजन की तैयारी थी। यही नहीं, इस जमीन पर निर्माण के लिए सीमेंट और ईंट सहित अन्य निर्माण सामग्री भी पहुंचा दी गई थी। मंडलायुक्त ने निर्देश दिया है कि इस पूरे मामले में फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
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जिला मुख्यालय से तीन किमी दूर ही फर्जीवाड़ा
राय साहब का बगीचा जिला मुख्यालय से तीन किलोमीटर की दूरी पर है। जिले के आला अधिकारियों के साथ ही विकास प्राधिकरण का कार्यालय भी पास ही है। इस जमीन पर पिछले 10 दिन से गतिविधियां तेज हो गई थीं, मगर जमीन के सट्टे से लेकर अवैध कब्जे तक की भनक किसी अधिकारी को नहीं लग पाई।
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