इसके बाद आननफानन फर्जीवाड़े की योजना बनाई गई। 12 सितंबर को ई-स्टांप के लिए रुपये जमा कराए गए और 13 सितंबर को इसका सट्टा करा लिया गया। सबसे अहम बात यह है कि इस जमीन पर न्यायालय ने सरकार के पक्ष में भी हर बार फैसला दिया था और विकास प्राधिकरण इस पर काबिज था। बावजूद इसके मिलीभगत कर बैनामा कराया गया।
टेंट लगाकर कार्यक्रम की थी तैयारी
मंगलवार देर रात और बुधवार सुबह कमिश्नर के निर्देश पर कैंट पुलिस के साथ विकास प्राधिकरण ने अवैध कब्जे की कोशिश करने वालों को खदेड़ा। यहां टेंट आदि लगाकर किसी कार्यक्रम के आयोजन की तैयारी थी। यही नहीं, इस जमीन पर निर्माण के लिए सीमेंट और ईंट सहित अन्य निर्माण सामग्री भी पहुंचा दी गई थी। मंडलायुक्त ने निर्देश दिया है कि इस पूरे मामले में फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
जिला मुख्यालय से तीन किमी दूर ही फर्जीवाड़ा
राय साहब का बगीचा जिला मुख्यालय से तीन किलोमीटर की दूरी पर है। जिले के आला अधिकारियों के साथ ही विकास प्राधिकरण का कार्यालय भी पास ही है। इस जमीन पर पिछले 10 दिन से गतिविधियां तेज हो गई थीं, मगर जमीन के सट्टे से लेकर अवैध कब्जे तक की भनक किसी अधिकारी को नहीं लग पाई।