पठानकोट एयरबेस पर इसी साल दो जनवरी को हुए आतंकी हमले का मास्टर माइंड माना जाने वाला शाहिद लतीफ वर्ष 2010 तक वाराणसी सेंट्रल जेल में ही बंद था। सुरक्षा कारणों से वर्ष 2005 में उसे जम्मू जिला जेल से यहां सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया गया था। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े लतीफ को यहां कड़ी सुरक्षा निगरानी के बीच तन्हाई बैरक (बैरक नंबर एक) में रखा गया था। बंदियों और बंदीरक्षकों को उसकी बैरक तक जाने की इजाजत नहीं थी। करीब पांच साल बाद केंद्र सरकार के आदेश पर सुरक्षा एजेंसियां उसे यहां की जेल से बाघा बार्डर ले गई थीं।
इस बीच लतीफ को यूपीए शासनकाल में रिहा किए जाने के मुद्दे पर सियासी बवाल खड़ा हो गया है। भाजपा ने इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा है। दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा ने कहा है कि कांग्रेस शुरू से ही आतंकवाद के प्रति नरम रुख अपनाती रही है। गौरतलब है कि यूपीए शासनकाल में पाकिस्तान से संबंध सुधारने के क्रम में लतीफ को 2010 में 20 अन्य कैदियों के साथ रिहा किया गया था। वह जून 1996 में जम्मू में गिरफ्तार किया गया था। कंधार कांड के समय भी लतीफ की रिहाई की मांग हुई थी लेकिन उस समय केवल जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर को छोड़ा गया था।
दो जनवरी की भोर में करीब साढ़े तीन बजे पठानकोट वायुसेना स्टेशन पर आतंकियों ने हमला कर दिया था। सेना की जवाबी कार्रवाई में छह आतंकी मारे गए थे जबकि सेना के सात सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे। सुरक्षा एजेंसियों ने दावा किया था कि पठानकोट हमले में जैश-ए-मोहम्मद का हाथ है। मसूद अजहर ने ही हमले की साजिश रची थी। जांच के दौरान आतंकियों के मुख्य हैंडलर के रूप में लतीफ का नाम सामने आया। सुरक्षा एजेंसियों की पड़ताल में पता चला है कि पाक अधिकृत कश्मीर के मुदामशाबाद निवासी लतीफ को 1996 में गिरफ्तार किया गया था। केंद्र सरकार के निर्देश पर 2005 में जम्मू की जिला जेल से उसे वाराणसी सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया गया था। वाराणसी जेल में उसे अति सुरक्षित बैरक नंबर एक में रखा गया था। सेंट्रल जेल के वरिष्ठ अधीक्षक संजीव कुमार त्रिपाठी ने बताया कि शाहिद लतीफ करीब पांच साल तक यहां बंद था। 2010 में केंद्र सरकार के निर्देश पर सुरक्षा एजेंसियां उसे यहां से बाघा बार्डर ले गई थीं।
उधर इस मुद्दे पर यूपीए सरकार को घेरते हुए भाजपा के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा ने कहा है कि यूपीए शासनकाल में गंभीर गलतियां की गईं, जिसे देश भुगत रहा है। पठानकोट हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने बहादुरी से आतंकियों को ढेर किया। तब कांग्रेस ने उस आपरेशन पर भी सवाल खड़े किए थे। कांग्रेस सुरक्षा बलों का मनोबल तोड़ने का काम करती रही है। तलीफ को रिहा किया जाना भयंकर भूल थी जिसे देश ने पठानकोट के हमले के रूप में झेला।