रेलवे फाटक बंद होने के चलते शनिवार की देर रात एक महिला और गर्भ में पल रहे शिशु की जान चली गई। फाटक पर महिला प्रसव पीड़ा से तड़पती रही। फाटक खुलने के बाद परिवार के लोग जब उसे लेकर अस्पताल पहुंचे तो चिकित्सक ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
कस्बे के मोहल्ला नासही निवासी मनोज कुमार गुप्त की पत्नी राधा गुप्ता (30) को शनिवार को रात लगभग 12 बजे अचानक पेट में दर्द उठा। घरवाले उसे निजी वाहन से जिला मुख्यालय स्थित अस्पताल ले जा रहे थे कि रास्ते में रेलवे फाटक बंद हो गया।
फाटक काफी देर तक बंद था। उधर राधा की हालत बिगड़ती जा रही थी। 30 मिनट बाद फाटक खुलने पर लोग उसे लेकर अस्पताल पहुंचे तो डाक्टर ने राधा और गर्भस्थ बच्चे को मृत घोषित कर दिया। बताया कि आने में देरी से मां व पेट में पल रहे 8 माह के बच्चे की मौत हो गई।
स्टेशन अधीक्षक कौशल किशोर सेठ ने बताया कि जफराबाद जंक्शन के अंतर्गत कुल 5 क्त्रससिंग पर रूट रिले इंटरलाकिंग की व्यवस्था है। पांचों गेट में से जफराबाद -जौनपुर का गेट नं 38 ए सबसे व्यस्त गेट है। इस पर एक-एक बार में तीन से चार ट्रेनें, मालगाड़ी और पैसेंजर आ जाती हैं।
ऐसे में गेटमैन एक बार गेट बंद कर चाबी स्टेशन मास्टर को दे देता है और चाबी पाने के बाद स्टेशन मास्टर रूट को लाक कर देता है। फिर जब तक ट्रेन गुजर नहीं जाती तब तक चाबी रिलीज नहीं होती। बिना ट्रेन गुजरे स्टेशन मास्टर भी इसे नहीं खोल सकता है। उन्होंने बताया कि फाटक रात 11. 45 बजे से 12.15 बजे के बीच बंद रहा।
क्रासिंग बंद होने से पहले भी जा चुकी हैं कई जाने
फाटक पर इस तरह का यह पहला वाकया नहीं है। 14 जनवरी 2017 में कस्बे के महेंद्र कुमार की पुत्री मोना 23 की भी फाटक पर रुकने की वजह से डिलेवरी में देरी हुई और उसकी मौत हो गई थी। कस्बे के ही जमाल अहमद को दिल का दौरा पड़ा। उनकी भी मौत का कारण उक्त रेलवे फाटक ही माना जाता है।
इसी प्रकार मोहल्ला नासही निवासी जवाहर लाल सेठ को भी दिल के दौरा पड़ा उसमें भी फाटक काफी समय तक बंद रहा और उनकी भी जान चली गई थी। घटना से लोगों में नाराजगी है। कहा कि फाटक पर आटो लाकिंग तकनीक को हटाएं या वहां ओवरब्रिज का निर्माण कराया जाए।
व्यापार मंडल अध्यक्ष सूबेदार सिंह, उमाकान्त गिरी ने कहा इमरजेंसी पर फाटक खुलने की व्यवस्था हो इसके लिए रेलवे के उच्चाधिकारियों से बात की जाएगी।