सोनौली बार्डर पर पकड़ा गया पाकिस्तानी नागरिक जावेद कलाम कृषि वैज्ञानिक है या फिर वह आईएसआई का एजेंट है, इसे जानने के लिए केंद्र और सूबे की खुफिया एजेंसियां गुरुवार को परेशान रहीं। उसकी असल पहचान जानने के लिए देर रात तक महाराजगंज में उससे पूछताछ होती रही।
तुर्की में 10-14 नवंबर, 2013 में ‘इंटरनेशनल प्लांट ब्रीडिंग कांग्रेस’ का आयोजन कराने वाले कमेटी से संपर्क स्थापित कर लिया गया है। कमेटी को जावेद की फोटो भेज दी गई है। अब उनके जवाब का इंतजार किया जा रहा है। एजेंसी के सूत्रों की मानें तो या वह किसी वैज्ञानिक जावेद कमाल के नाम का इस्तेमाल कर रहा या फिर उसकी डिग्री फर्जी है।
हालांकि अब तक उसके किसी आपराधिक उद्देश्य का पता नहीं चला है और न ही किसी आतंकी संगठन से जुड़े होने का कोई प्रमाण मिला है। 23 अक्तूबर को नेपाल से भारत आते समय जावेद कमाल को एसएसबी ने सोनौली बार्डर से गिरफ्तार किया था। उसके पास से एमएससी और पीएचडी की डिग्री मिली थी।
साथ ही 50 से ज्यादा शोधपत्र मिले थे। खुफिया एजेंसी के सूत्रों की मानें तो अगर जावेद रेकी करने के उद्देश्य से काशी जाता तो अपनी पहचान छिपाकर आता। वह अपने पास पाकिस्तान का पासपोर्ट और पाकिस्तान का शोधपत्र लेकर नहीं आता। वह थाई मुद्रा लेकर भी भारत में नहीं घुसता।
बहरहाल सुरक्षा एजेंसियां सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर पड़ताल कर रही हैं। पूछताछ में ही पता चला कि वह फेसबुक भी चलाता है। हालांकि उसने अपने निवास स्थान के बारे में कुछ नहीं लिखा। उसने दिल्ली और मुंबई के कई स्थानों को लाइक भी किया है।
काशी के बारे मे न तो कुछ लिखा है और न ही काशी के किसी स्थान को लाइक ही किया है। उसके काशी कनेक्शन की पड़ताल भी की जा रही है। वह काशी क्यों और किससे मिलने जा रहा था यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। उसने कृषि वैज्ञानिक डा. शिशिर से मिलने की बात कही थी लेकिन इस नाम का कोई वैज्ञानिक काशी में नहीं है। शुक्रवार को फिर से जावेद से पूछताछ की जाएगी।