लाखों रुपये मूल्य की सरकारी दवाएं गुरुवार को मिर्जापुर के मंडलीय चिकित्सालय के पीछे गंगा किनारे कूड़े में फेंकी मिलने से स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया। सीएमओ ने खुद मौके पर जा कर जांच की। इनमें तमाम दवाएं इसी साल जुलाई में एक्सपायर होनी हैं जबकि कुछ एक्सपायर हो चुकी थीं।
उन्होंने मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी है।
दोपहर में कुछ लड़के मंडलीय चिकित्सालय के पीछे क्रिकेट खेल रहे थे। गेंद गंगा किनारे की तरफ गई वहां भारी मात्रा में दवाएं बिखरी देख लड़कों ने शोर मचाया तो भीड़ जमा हो गई। इसकी सूचना मिलते ही स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया।
आनन-फानन में दवाओं को ठिकाने लगाने के प्रयास शुरू हो गए। इन दवाओं में बुखार, डायरिया, मलेरिया, ब्लड प्रेशर, एलर्जी और दर्द की तथा कुछ एंटीबायोटिक दवाएं थीं। इनमें कुछ एक्सपायर्ड थीं जबकि ज्यादातर की एक्सपायरी जुलाई 2017 की है।
इसी बीच सीएमओ डा. विधु गुप्त ने उन दवाओं के नमूने मंगवाए और उन्हें देखने के बाद वे खुद मौके पर पहुंच गए। उस समय कुछ लोग दवाओं को गंगा तट पर मिट्टी में दबाने का प्रयास कर रहे थे। सीएमओ ने उन्हें पकड़वाने का प्रयास किया पर वे भाग निकले।
स्वास्थ्य कर्मी देर शाम तक दवाएं एकत्रित कर रहे थे। कुल कितनी दवाइयां बरामद हुईं, इसका आकलन नहीं किया जा सका है।
बता दें कि जहां दवाएं फेंकी मिली हैं वहीं जिले का ड्रग स्टोर भी है। जो तमाम दवाएं मिली हैं उनके पत्ते कटे होने से अनुमान लगाया जा रहा है कि ये मंडलीय अस्पताल के स्टोर की हो सकती हैं। जानकारों का कहना है कि दवाओं की खरीद में बड़े पैमाने पर घपला किया गया है।
स्टाक रजिस्टर की गड़बड़ी छुपाने के लिए दवाओं को फेंक दिया गया है।