यूपी की सरकार कानून व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त करने के लाख दावे करे, लेकिन अपराध पर लगाम नहीं लग रहा। ताजा मामला गाजीपुर का है। यहां एक सिरफिरे प्रेमी ने 11वीं की छात्रा को चाकू से गोद डाला। वारदात को अंजाम देने के बाद खुद थाने पहुंचा और अपना जुर्म कबूल किया।
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घटना शुक्रवार शाम की है जब छात्रा स्कूल से वापस घर लौट रही थी। घटना के बाद पुलिस ने छात्रा के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। छात्रा की हत्या से पूरे इलाके में दहशत व्याप्त है। मामला दिलदारनगर थाना क्षेत्र के बहुआरा गांव का है।
गांव की रहने वाली कुमारी अर्चना दिलदारनगर के एक स्कूल में 11वीं विज्ञान वर्ग की छात्रा थी। वह रोज की तरह पैदल ही पढ़ने के लिए स्कूल गई थी, छुट्टी के बाद शाम वापस घर लौटते समय एक शरारती युवक ने उसे रास्ते में रोक दिया और उसे खींचकर एकांत में ले जाने लगा।
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छात्रा के विरोध करने तथा शोर मचाने पर युवक ने उसे चाकू मार दिया। खून से लथपथ छात्रा को जब तक अस्पताल ले जाया जाता, उसकी सांसें थम गईं। घटना के दौरान मौजूद लोग तमाशबीन बने रहे।
उधर हमलावर घटना को अंजाम दे सीधे थाने पहुंच गया। आरोपी रंजीत रावत, निवासी बहुआरा से पुलिस पूछताछ कर रही थी। आरोपी दो साल से बंगलूरू में एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता है । वह एक हफ्ते पहले ही घर आया था।
बताया जाता है कि वह पिछले ढाई साल से छात्रा से छेड़छाड़ कर रहा था। उसके घर पर इसकी शिकायत भी की गई थी। पीड़ित परिवार का कहना है कि आरोपी जब भी गांव आता था, तब छात्रा को परेशान करता था।
हमलावार से अकेले भिड़ी छात्रा, छोटी बहन और सहेली ने छोड़ा साथ
11वीं की छात्रा कुमारी अर्चना
- फोटो : अमर उजाला
दिलदारनगर-जमानिया मुख्य मार्ग से होकर बहुआरा जाने वाले मार्ग से प्रतिदिन की तरह शुक्रवार को सायंकाल 11वीं की छात्रा कुमारी अर्चना पुत्री अनिल राम अपनी छोटी बहन कुमारी नेहा (कक्षा छह) तथा दो अन्य छात्राएं मनीषा (कक्षा आठ) और अमिता (कक्षा आठ) के साथ घर लौट रही थी।
बीच रास्ते में वहां पहले से एक युवक खड़ा था। उसने अर्चना को रोका और जबरदस्ती एक मकान में खींचकर ले जाने लगा। इसका विरोध करने तथा शोर मचाने पर चाकू लहराते हुए अन्य लड़कियों को भगा दिया। इसके बाद भी छात्रा अर्चना युवक से अकेली ही लड़ती रही।
कहना न मानने पर युवक ने छात्रा के पेट में चाकू से कई वार किए। इसके बाद छात्रा लहूलुहान हो जमीन पर गिरकर तड़पने लगी। जब तक उसको अस्पताल ले जाया जाता उसके प्राण पखेरू उड़ गए। इसके बाद घटना की जानकारी ग्रामीणों ने 100 नंबर को दी।
छात्रा की हत्या की खबर मिलते ही पुलिस के हाथ-पैर फूलने लगे। आनन-फानन में घटना स्थल पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेने के बाद आरोपी की तलाश शुरू कर दी।
इसी बीच शाम करीब साढ़े पांच बजे खुद ही आरोपी युवक थाने पहुंच गया और अपना जुर्म कबूल कर लिया। घटना के बाद सीओ आरबी सिंह तत्काल मौके पर पहुंच गए और छात्रा के परिवार वालों के साथ ही हत्यारोपी रंजित रावत निवासी बहुआरा थाना दिलदारनगर से पूछताछ की जा रही थी।
दो माह पहले भी इसी तरह से हुआ था छात्रा पर हमला
प्रतीकात्मक तस्वीर
छह सितंबर को गाजीपुर जिले में इसी तरह की घटना सामने आई थी। गाजीपुर जिले के गौसपुर गांव में छह सितंबर की सुबह बाइक पर बैठने से इंकार करने पर मनबढ़ युवक ने एक छात्रा को चाकू मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया था।
मौके पर पहुंचे आसपास के लोगों ने किशोरी को उपचार के लिए सीएचसी ले जाया गया। किशोरी के पिता की तहरीर पर युवक के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज कर कर आरोपी को गिरफ्तार किया था।
रागिनी हत्याकांड की याद हुई ताजा
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- फोटो : अमर उजाला
बलिया के मझौली बजहा गांव में बीते आठ अगस्त को 12वीं की छात्रा रागिनी दुबे की सरेराह गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। रागिनी अपनी बहन के साथ स्कूल जा रही थी, इसी दौरान गांव के बाहर सड़क पर प्रधान पुत्र ने साथियों के साथ मिलकर निर्मम हत्या कर दी थी। घटना के आठ घंटे के भीतर ही पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि तीन अन्य आरोपियों ने भी सप्ताहभर के अंदर कोर्ट में सरेंडर कर दिया।
मौका-ए-वारदात पर मौजूद रागिनी की छोटी बहन ने मीडिया में बयान दिया था कि रागिनी ने छेड़छाड़ का विरोध किया था। प्रिंस करीब छह-सात महीने से उसे परेशान कर रहा था। जिसकी वजह से पिता जितेंद्र दुबे ने उसे स्कूल जाने से भी रोक दिया था। आठ अगस्त की सुबह सात बजे जब रागिनी स्कूल के लिए निकली तो प्रिंस ने अपने चचेरे भाई और साथियों के साथ मिलकर उसकी गला काटकर हत्या कर दी।
इसके बाद भारी जनाक्रोश को देखते हुए पुलिस ने आठ घंटे के अंदर ही हत्याकांड के मुख्य आरोपी प्रिंस तिवारी व उसका साथी राजू यादव को पुलिस ने गोरखपुर के रास्ते से गिरफ्तार कर लिया था। जबकि मामले में गांव के प्रधान तथा मुख्य आरोपी प्रिंस के पिता कृपाशंकर तिवारी सहित नीरज तिवारी व सोनू तिवारी 11 अगस्त को कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिए।
इसके बाद पीड़िता के दरवाजे पर राजनेताओं के आनेजाने का दौर शुरू हुआ। लेकिन पीड़ित पिता जितेंद्र दूबे आज भी उस दिन को याद कर सिहर उठते हैं। उनकी दो बेटियां और भी है। जिन्हें लेकर जितेंद्र दहशत में जीने को मजबूर है। मामले में पांचों आरोप फिलहाल जेल में हैं।
होनहार पोती को मृत देख पथरा गई बाबा की आंखें
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- फोटो : अमर उजाला
रेलवे सुरक्षा बल में सब इंस्पेक्टर के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद हरिराम अपनी होनहार पोती को उच्च शिक्षा देकर समाज में एक मिसाल पैदा करना चाहते थे। लेकिन उनके आंखों में बसे सपने मृत पड़ी छात्रा के शव को देखकर पथरा गई। जब पोती ने हाईस्कूल की परीक्षा में बाबा के सपने को साकार करते हुए 82 प्रतिशत लाया, तो सिर फक्र से ऊंचा हो उठा था।
पोती के सपने में पंख लगाने के लिए वे भी अपने आंखों में सपने सजोने लगे। अपनी बड़ी बहन अर्चना को आगे बढ़ता देख छोटा भाई अंकित, अर्चना और अमित भी अपने को अव्वल दिखाने के लिए बहन के साथ मन लगाकर पढ़ाई करने लगे।
पिता अनिल राम मजदूरी करने के बाद भी अपने बच्चों के इस लगन को देख सारे दर्द भूल जाता था। मृतका बड़ी बहन अर्चना के साथ छोटी बहन नेहा भी कुश स्मारक उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय में घर से रोजना पैदान ढाई किलो मीटर की दूरी तय करती थी।
वहीं दोनों छोटे भाई अंग्रेजी मीडियम से सन साईन पब्लिक स्कूल में पढ़ाई करते है। लेकिन उनको क्या पता था कि आज से उनकी बड़ी बहन उनके बीच नहीं रहेगी। बाबा हरिराम अपने अन्य पोतों-पोती को देख उन्हें पकड़कर रोना शुरू कर देते थे।
यह दृश्य देख हर कोई के आंख से आंसू निकल रहे थे। बस सभी यही कह रहे थे कि बाबा की आंखों का सपना हत्यारे ने समाप्त कर दिया।
अभिभावकों की आंखों में आज भी सवाल तैर रहा है कि आखिर कैसे महफूज रहेंगी हमारी बेटियां ? 11वीं की छात्रा की हुई हत्या के बाद लोगों को इस सवाल को लेकर चिंता में डूबे हुए हैं। हत्यारोपी की साहस और निर्ममता को देख सबकी जुबान बंद है। लोगों की आंखों में गम के साथ गुस्सा भी साफ दिखाई दे रहा है। अब बेटियों की सुरक्षा का भय सबको सताने लगा है। अपनी लाडली बिटिया के लिए बड़े सपने देखने वाले माता-पिता सोचने पर मजबूर हैं कि आखिर कहां जाएं ? क्या करें, जिससे हम और हमारी बेटियां महफूज रहे।
बहुअरा गांव के ग्रामीण और क्षेत्र के लोगों को जैसे ही घटना की जानकारी हुई। सभी पहले पीड़ित परिवार के घर पहुंचे। इसके बाद ग्रामीण थाने की तरफ दौड़ पड़े, जहां पीड़ित परिवार से पुलिस पूछताछ कर रही थी। हर कोई चुपचाप एक-दूसरे को निहार रहा था। खौफ के मारे अंदर ही अंदर लोग घुट रहे थे। उनके समझ में ही नहीं आ रहा था कि आखिर बेटियां इस असुरक्षित समाज में कैसे उच्च शिक्षा और कामयाबी को हासिल कर पाएगी।
रोते -बिलखते परिजनों की आवाज सुनकर खड़े अभिभावकों के बंद पड़े जुबान इस निर्ममता को देख कांप उठा था। उनके चेहरे पर उदासी और बेटियों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल कौंध रहे थे। समाज के बदलते दौर में इन नई पीढ़ी के युवकों को क्या हो गया है।
आखिर कब तक बेटियों की सुरक्षा के लिए मां-बाप को भयभीत रहना पड़ेगा। इन तमाम सवालों को अपने जेहन में सिमटे इन अभिभावकों की गहरी सोच को मृतका के परिजनों के रोने-बिलखने की आवाज बार-बार तोड़ती दिख रही थी। इन सबके बीच घटना से जहां वे भयभीत दिखाई पड़ रहे थे, वहीं पुलिस की कार्य-प्रणाली को लेकर उनके चेहरे पर आक्रोश साफ झलक रहा था।