कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के भाई और उनके प्रतिनिधि/भासपा के जिलाध्यक्ष द्वारा जमीन की पैमाईश कर रहे राजस्व कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार करने तथा मारपीट करने का मामला प्रकाश में आया है। घटना के तीन दिन बाद भी इस मामले में पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है।
इससे राजस्व कर्मियों में भय व्याप्त है। सोमवार को पीड़ित पक्ष की तरफ से थाने में दी गई तहरीर के बाद मामला प्रकाश में आया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिलाधिकारी संजय कुमार खत्री ने जमीन की पैमाइश कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था।
डीएम क ा निर्देश मिलने पर 17 जून को चकबंदी कर्मी कानूनगो बालचंद राम, लेखपाल प्रदीप कुमार और एसीओ राम मिलन यादव बरेसर थाने के जहूराबाद परगना के सहज रामपुर गांव चक संख्या 127 के प्रस्तावित गाटा संख्या 91 की पैमाइश करने के लिए शाम चार बजे पहुंच गए।
उन्होंने जैसे ही पैमाइश शुरू की इससे सटे गाटा संख्या 89 और 90 के काश्तकार भासपा के जिलाध्यक्ष और मंत्री प्रतिनिधि रामजी राजभर और मंत्री के भाई राजनेत राजभर पैमाइश रोकने को कहने लगे। इसी बात को लेकर पैमाइश करने आई राजस्व कर्मियों की टीम के सदस्यों और दोनों काश्तकारों में कहासुनी होने लगी।
इतने पर भासपा के जिलाध्यक्ष एवं मंत्री प्रतिनिधि और उनके भाई कानूनगो बालचंद राम को जाति सूचक शब्दों से गाली देते हुए जान से मारने की धमकी देने के साथ मारने-पीटने लगे। मारपीट के बाद पैमाइश नहीं हो सकी। जबकि टीम के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी डर के मारे भाग खड़े हुए।
इसके बाद पीड़ित कानूनगो ने थाने को सूचना दी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। सोमवार को इस प्रकरण में पीड़ित कानूनगो ने थाने में लिखित तहरीर दी है। कानूनगो ने तहरीर के माध्यम से पुलिस को बताया गया कि दलित जाति सूचक शब्दों से गाली देते हुए मुझे मारा-पीटा गया है।
मारपीट में मुझे चोटें आई हैं तथा मानसिक रुप से काफी आहत हूं। तहरीर देने के बाद भी पुलिस द्वारा मंत्री प्रतिनिधि और उसके भाई के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे पीड़ित और उनके परिजनों में भय व्याप्त है। पीड़ित ने बताया कि सत्ता के दबाव में थानाध्यक्ष एवं अधिकारी बात नहीं सुन रहे हैं और न ही कोई कार्रवाई कर रहे है।
इस संबंध में बरेसर थानाध्यक्ष गौतम सिंह ने बताया कि पैमाइश के दिन पुलिस बल इनके लिए अधिकृत किया गया था, लेकिन यह लोग बिना पुलिस बल लिए पैमाइश करने चले गए। घटना की तहरीर मिली है, पूरे मामले की जांच चल रही है।
कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि घटना की जानकारी हमें नहीं है। प्रार्थना पत्र देने से कोई दोषी नहीं होता है। अगर दोषी पाया गया तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।