तीन साल की मासूम के साथ हैवानियत करने वाले अधेड़ दरिंदे को अंततः सजा मिल ही गई। सजा भी ऐसी कि अब उसे अपनी बची-खुची जिंदगी सलाखों के पीछे काटनी होगी। घटना यूपी के मिर्जापुर की है।
द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार मिश्र ने दुष्कर्म के आरोप में एक अधेड़ को दोष सिद्ध पाये जाने पर दो अलग-अलग धाराओं में आजीवन कारावास के दंड के साथ 60 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित कर जेल भेज दिया।
अभियोजन अनुसार थाना मड़िहान क्षेत्र के राजगढ़ ददरा गांव निवासी आरोपी रामधनी पुत्र तौलन के ऊपर आरोप है कि क्षेत्र की तीन साल की बालिका को वह बहला-फुसला कर अपने घर ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया।
बालिका के शोर मचाने पर उसकी मां और पिता तथा गांव के अन्य लोग भी मौके पर पहुंच गए। बालिका के पिता की सूचना पर 24 दिसंबर 2013 को तहरीर के आधार पर पुलिस ने धारा 376 भादंस एवं पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर पीड़िता का मेडिकल कराया था।
पुलिस ने विवेचना करते हुए आरोप पत्र न्यायालय में दिया था। अभियोजन की तरफ से वरिष्ठ शासकीय अधिवक्ता फौजदारी रमेन्द्र कुमार शुक्ल ने कुल तीन गवाह परीक्षित कराये। इसकी सुनवाई न्यायालय ने मंगलवार को की।
अधिवक्ताओं की दलील, पत्रावली पर उपलक्ष्य साक्ष्य एवं मेडिकल के आधार पर न्यायालय ने पांच वर्ष से कम आयु की बालिका के साथ दुष्कर्म होना सिद्ध पाया। घृणित अपराध पाते हुए दोनों धाराओं में अभियुक्त को आजीवन कारावास के साथ 30-30 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित कर जेल भेज दिया।
अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि अर्थदंड की राशि 60 हजार रुपये पीड़िता की मां को प्रतिकर के रूप में दिया जाय।