यूपी के बलिया में एक डॉक्टर दंपती बिना उचित डिग्री के प्रसव कराते थे। रविवार को प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत होने से इस बात का खुलासा हुआ।
बलिया जिले में लाइफ लाइन निजी नर्सिंग होम में रविवार की दोपहर जच्चा-बच्चा की मौत के बाद जिलाधिकारी सुरेंद्र विक्रम ने देर रात अस्पताल पर छापेमारी की।
जांच में नर्सिंग होम में कई खामियां मिलने पर चिकित्सक डॉ. परमात्मा प्रसाद गुप्ता व उनकी पत्नी सीमा गुप्ता को शहर कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
वहां भर्ती मरीजों को महिला अस्पताल में भेज दिया गया। डिप्टी सीएमओ डा. संजय सिंह की तहरीर पर पुलिस ने चिकित्सक के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया। जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। प्रशासन की इस कार्रवाई से अन्य निजी अस्पताल संचालकों में हड़कंप मचा है।
लाइफ लाइन अस्पताल में नारायणगढ़ निवासी रीमा (22) पत्नी दीपक पासवान को गांव की आशा बहू दया ने सरकारी अस्पताल की जगह लाइफ लाइन हास्पिटल में रविवार की सुबह भर्ती करवाया था। जहां दोपहर में आपरेशन के बाद जच्चा-बच्चा दोनों की ही मौत हो गई थी।
इसके बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया था। इसकी जानकारी पर डीएम ने रात में दल-बल के साथ लाइफ लाइन नर्सिंग होम पर छापा मारा। अस्पताल व उसके अभिलेखों की जांच कराई, जिसमें तमाम खामियां मिली।
अस्पताल संचालक डॉक्टर की पत्नी सीमा देवी है, जिसने मात्र एएनएम की ट्रेनिंग की है। चिकित्सक परमात्मा प्रसाद गुप्ता की डिग्री आयुर्वेद की मिली। बावजूद इसके दोनों सर्जरी कर प्रसव कराते थे।
जमानत अर्जी खारिज
पूछताछ करते डीएम
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डीएम के निर्देश चिकित्सक और उसकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया गया। वहां भर्ती मरीजों को एंबुलेंस से जिला महिला चिकित्सालय भेज दिया गया। इस दौरान डीएम ने मरीजों व उनके तीमारदारों से उनके स्वास्थ्य संबंधी पूछताछ की।
डीएम ने कहा कि इस तरह के अवैध तरीके से नर्सिंग होम का संचालन कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे लोग सीधे जेल जाएंगे। सोमवार को सीजेएम कोर्ट में चिकित्सक व उसकी पत्नी की जमानत अर्जी खारिज कर दी गई, जिसके बाद दोनों को जेल भेज दिया गया।
इस दौरान सिटी मजिस्ट्रेट मनोज कुमार पांडेय, सीएमओ डॉ. बाबू नंदन सिंह, शहर कोतवाल शशिमौलि पांडेय, महिला सीएमएस डॉ सुमिता सिन्हा समेत पुलिस बल मौजूद था।
जिलाधिकारी सुरेंद्र विक्रम ने नवागत सीएमओ बाबू नंदन सिंह को निर्देश दिया कि सभी निजी अस्पतालों की जांच करें, जिनकी कागजी कार्रवाई पूरी न हो और डॉक्टर मानक पर खरे नहीं उतरते हों। ऐसे नर्सिंग होम को तत्काल बन्द करें। इसके लिए अभियान चलाएं। अब ऐसे मामले सामने आए तो सबकी जिम्मेदारी तय की जाएगी।