सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ने तीन सौ करोड़ रुपये के मनरेगा घोटाले में आठ आरोपियों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। राबर्ट्सगंज ब्लॉक से संबंधित सभी आरोपियों की ओर से अंतरिम जमानत के लिए सीबीआई की पंचम कोर्ट में दी गई अर्जी को कोर्ट ने खारिज कर दिया था।
नियमित जमानत अर्जी पर सुनवाई के लिए 15 अप्रैल की तारीख तय की है। इसके पूर्व भी इस मामले में कई लोगों को जेल भेजा जा चुका है।
जिले में वर्ष 2006 से 2009 के बीच मनरेगा के तहत कराये गए विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई थी।
सड़क, तालाब, चेकडैम, बंधी आदि का निर्माण कागजों में करा दिया गया था। स्थानीय स्तर पर की गई शिकायत के बाद मानकों की अनदेखी और सरकारी धन के बंदरबाट का खुलासा हुआ था। लखनऊ और दिल्ली से आई नेशनल लेबिल मानीटरों की टीम के साथ ही ग्राम्य विकास के उच्चाधिकारियों की जांच में करीब तीन सौ करोड़ रुपये का मनरेगा घोटाला का मामला सामने आया।
इसके बाद उच्च न्यायालय के 31 जनवरी 2014 के आदेश पर जब सीबीआई ने इस घोटाले की जांच शुरू की तो सच्चाई परत दर परत खुलकर सामने आने लगी। सीबीआई टीम ने जिले में जगह जगह ताबड़तोड़ छापेमारी की। पूर्व में कई लोगों को सीबीआई ने तलब कर पूछताछ किया था।
इसके बाद विधानसभा चुनाव के समय मामला ठंडा पड़ गया था लेकिन सोमवार को एक बार फिर सीबीआई की कार्रवाई सामने आने के बाद संबंधितों में हड़कंप की स्थिति है।
घोटाले के आरोपी रमाशंकर देव पांडेय, अखिलेश, सविता देवी, चंद्र देव पांडेय, वीरेन्द्र कुमार समेत आठ को सीबीआई ने गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया और बताया कि सोनभद्र जनपद में हुए मनरेगा घोटाले के मामले में आरोपियों को पूछताछ करने केलिए नोटिस देकर लखनऊ कार्यालय में बुलाया गया था।
जहां पूछताछ के बाद आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य मिलने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इस जांच के दायरे में डेढ़ सौ से अधिक लोग आए।