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शर्मनाक : बीएचयू के प्रोफेसर ने महिला शिक्षिका के साथ किया बलात्कार

Sat, 17 Jun 2017 06:09 PM IST
amarujala.com- Written by: अनूप ओझा
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gurgaon gang rape
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बीएचयू प्रबंध शास्त्र संकाय के चार माह से लापता चल रहे प्रो. अभिजीत सिंह के बारे में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। चार महीने से सहकर्मियों, शिष्यों के अलावा रजिस्ट्रार कार्यालय को पता नहीं था कि आखिर वह अचानक गए कहां? लेकिन अब सचाई सामने आने के बाद लोग सन्न रह गए हैं।
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वह कहीं लापता नहीं हुए, बल्कि शोध के लिए संपर्क में आई एक महिला असिस्टेंट प्रोफेसर के साथ होटल में बलात्कार करने के आरोप में तिहाड़ जेल में बंद थे। तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद यहां आने के बाद बीएचयू प्रशासन ने उन्हें निलंबित कर दिया है।

पश्चिमी यूपी के एक डिग्री कॉलेज में तैनात दिल्ली की निवासिनी महिला असिस्टेंट प्रोफेसर ने प्रो. अभिजीत के खिलाफ दिल्ली के ही पहाड़गंज थाने में बीती 17 जनवरी को पहुंचकर तहरीर दी। तहरीर में कहा कि एक शोध के सिलसिले में बीएचयू के प्रबंध शास्त्र संकाय के प्रो. अभिजीत सिंह से मैंने संपर्क किया था।
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कुछ दिनों बाद अभिजीत मेरे साथ व्यक्तिगत मुलाकात की जरूरत पर जोर देने लगे। इसके बाद आईआईएम नोएडा परिसर में आयोजित एक सेमिनार में शिरकत के बहाने अभिजीत ने मुझे वहां बुलाया। इस दौरान प्रो. अभिजीत ने अलवर (राजस्थान) के एक निजी विश्वविद्यालय में विजिट के लिए 13 दिसंबर 2016 को चलने के लिए कहा।

इसके बाद मुझे भ्रम में रखकर घर पहुंचाने के बजाय पहाड़गंज (दिल्ली) के होटल हरी पियार्को ले गए। वहां कॉफी के बहाने मुझे कोई ड्रिंक पिलाकर मेरे साथ दुराचार किया गया। 13 दिसंबर से 15 दिसंबर 2016 तक प्रो. अभिजीत मुझे उस होटल में बंधक बनाकर मेरी अस्मत लूटते रहे।
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तिहाड़ जेल में बंद रहे, विश्वविद्यालय प्रशासन इस घटना से रहा अंजान

rape with maid
पीड़िता असिस्टेंट प्रोफेसर ने पहाड़गंज थाने पहुंचकर आपबीती सुनाई। महिला की तहरीर के आधार पर पुलिस ने मारपीट, धमकी देने और बलात्कार के आरोप में प्रो. अभिजीत के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर असिस्टेंट प्रोफेसर का मेडिकल मुआयना कराया।

तीन फरवरी को पुलिस ने प्रो. अभिजीत को बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया। इधर, विश्वविद्यालय प्रशासन को प्रो. अभिजीत के जेल जाने के बारे में जानकारी ही नहीं थी।

रिहा होकर आने के बाद प्रो. अभिजीत ने रजिस्ट्रार कार्यालय को दिए पत्र में कहा कि उन्हें दुश्मनी और विद्वेष के तहत फंसाया गया था और वह इस दौरान जेल में थे। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

निदेशक और डीन-प्रबंध शास्त्र संकाय प्रो. राजकुमार ने कहा कि प्रो. अभिजीत को निलंबित किए जाने संबंधी आदेश रजिस्ट्रार कार्यालय से मुझे प्राप्त हो गया है। उन्हें किस आरोप में निलंहित किया गया इसकी जानकारी अभी मुझे नहीं है।
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