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बीएचयू की असिस्टेंट प्रोफेसर ने फांसी लगाकर जान दी

Tue, 26 Apr 2016 01:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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र डाक्टर स्वस्ति पांडेय ने खुदकुशी की ।
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 छेंका की रस्म के बाद लड़के के शादी से इंकार करने पर बीएचयू के इतिहास विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. स्वस्ति पांडेय (29) ने रविवार की रात फांसी लगाकर जान दे दी। घटना भेलूपुर थाना क्षेत्र की जानकी नगर कॉलोनी स्थित आवास पर हुई। पिता की सूचना पर पहुंची पुलिस ने मौके से एक सुसाइड नोट बरामद किया, जिसमें आत्महत्या की वजह शादी टूटना बताया गया है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के साथ ही अज्ञात के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है। डॉ. स्वस्ति की सगाई आगामी नौ मई को डीरेका में अधिकारी क्लब में होनी थी। वो छत्तीसगढ़ के कैबिनेट मंत्री प्रेम प्रकाश पांडेय की भतीजी थीं।
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देवरिया के मूल निवासी अशोक पांडेय अपने परिवार के साथ जानकी नगर कॉलोनी में मकान बनवाकर रहते हैं। दो बेटे और दो बेटियों में सबसे बड़ी डॉ. स्वस्ति छह माह पूर्व बीएचयू के इतिहास विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त हुई थीं। इससे पहले वह राजस्थान में अध्यापन कार्य में थीं। डॉ. स्वस्ति का विवाह डीरेका में तैनात वर्कशॉप मैनेजर इंजीनियर अंबेशमणि त्रिपाठी से तय था। कुछ ही दिन पहले छेंका की रस्म हुई थी। मंत्री प्रेम प्रकाश पांडेय के यहां वैवाहिक आयोजन के कारण डॉ. स्वस्ती की मां शीला और भाई अभिषेक और अनुराग छत्तीसगढ़ गए थे। पिता अशोक पांडेय और छोटी बहन समीक्षा घर पर थे।

बताया जाता है कि रविवार की रात अशोक पांडेय घर से दूध लेने बाहर निकले। लौटकर आए तो उन्होंने डॉ. स्वस्ति से चाय बनाने के लिए कहा लेकिन वो दिखीं नहीं। खोजने पर एक कमरा बंद मिला और काफी देर तक खटखटाने के बावजूद नहीं खुला। छोटी बेटी ने रोशनदान से देखा तो डॉ. स्वस्ति पंखे से लटकी थीं। सूचना भेलूपुर पुलिस को दी गई। पुलिस ने दरवाजा तोड़कर देखा तो पंखे से बंधे दुपट्टे के फंदे से शव लटका पड़ा था। भेलूपुर इंस्पेक्टर एके मिश्रा ने बताया कि तहरीर के आधार पर अज्ञात के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया है। इंजीनियर से भी पूछताछ की जाएगी। विवेचना के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर इंजीनियर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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जब मैं इतनी दुखी तो परिवार के लोगों पर क्या बीतेगी
पिता के बाहर जाने के दौरान ही डॉ. स्वस्ति को अंबेशमणि त्रिपाठी ने फोन किया था। दोनों में 45 मिनट तक बातचीत हुई थी। सूसाइड नोट में डॉ. स्वस्ति ने लिखा कि लड़के ने फोन कर कहा कि मैं शादी नहीं कर पाऊंगा, मेरे माता-पिता शादी के लिए तैयार नहीं हैं। अपने घर वालों को इस बात की जानकारी दे दो। इस पर डॉ. स्वस्ति ने कहा कि अब बहुत देर हो चुकी है।

यह सुनकर जब मुझे इतना बड़ा धक्का लगा है और मैं इतनी दुखी हूं तो मेरे परिवार के लोगोें पर क्या बीतेगी। अब तो शादी की बात सबको पता भी चल चुकी है और तैयारियां भी पूरी हो चुकी हैं। लिखा कि अब जो निर्णय लेना है मैंने भी ले लिया है।उन्होंने परिवार के लोगों के प्रेम के प्रति आभार जताया और आत्मघाती कदम उठाने के लिए माफी मांगी। उधर, घरवालों का कहना है कि लड़के ने दहेज के लिए अचानक शादी तोड़ने का फैसला लिया। हम लोग नौ लाख रुपये दे रहे थे लेकिन उसका कहना था कि 12-13 लाख रुपये लेकर तो हमारे घर के सामने लोग खड़े हैं और हम बात ही नहीं कर रहे हैं।


मेधावी छात्रा थीं डॉ. स्वस्ति
इंटरमीडिएट के बाद डॉ. स्वस्ति की पढ़ाई बीएचयू से हुई थी। छात्र जीवन में वो बेहद मेधावी रहीं। बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर वह बेहद मिलनसार थीं और छात्र-छात्राओं की मदद के लिए हमेशा तैयार रहती थीं। उनके आत्महत्या की सूचना मिलते ही सामाजिक विज्ञान संकाय के शिक्षकों और छात्र-छात्राओं का तांता लग गया। पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार के लिए शव हरिश्चंद्र घाट ले जाया गया तो वहां भी बड़ी संख्या में छात्र और शिक्षक मौजूद रहे। उधर, स्वाती की छोटी बहन और दोनों भाई रो-रोकर बेहाल थे। छोटी बहन बार-बार यही कह रहा था कि दीदी ने आखिर मुझसे मन की बात क्यों नहीं बताई। वो तो बहुत समझदार थीं, उन्होंने आखिरकार ऐसा कदम क्यों उठाया।
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