जिला सत्र न्यायालय बलिया से पेशी कराकर कानपुर लौटने के क्रम में एक बंदी फिल्मी अंदाज में ट्रेन से फरार हो गया। बंदी के भागने में उसके सहयोगियों ने मदद की। बंदी की सुरक्षा में लगे सिपाहियों को असलहा दिखाकर इंदारा रेलवे स्टेशन से छुड़ा लिया और फरार हो गए।
बंदी के भागने की रिपोर्ट दर्ज कराने वाले सिपाहियों को थानाध्यक्ष जीआरपी ने प्रथम दृष्टया दोषी पाया और गिरफ्तार कर लिया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने तीनों सिपाहियों को लापरवाही का दोषी पाते हुए जेल भेजने का आदेश दिया।
बताते चलें बलिया जिले के फेफना थाना क्षेत्र के खलिलपुर गांव निवासी बबलू उर्फ मिथिलेश पुत्र हरदेव मारपीट और बलवा की धारा में गिरफ्तार हुआ। उसे कानपुर सेंट्रल जेल स्थानांतरित किया गया। बुधवार को मिथिलेश की बलिया जिले के सिविल कोर्ट में पेशी थी।
कानपुर पुलिस लाइन से हेड कांस्टेबल पतरौल सिंह, कांस्टेबल जगवीर सिंह और कांस्टेबल विकास कुमार, लेकर बलिया आए थे। पेशी के बाद आरोपी को कानपुर वापस ले जाने के लिए तीनों सिपाही उत्सर्ग एक्सप्रेस में सवार हुए।
जीआरपी थाने में दर्ज रिपोर्ट में पतरौल सिंह ने पुलिस को बताया कि जिस समय वो आरोपी मिथिलेश सिंह को लेकर ट्रेन की बोगी में सवार हुए, कुछ और लोग भी बोगी में चढ़े। जैसे ही ट्रेन मऊ जिले के इंदारा रेलवे स्टेशन के आउटर पर पहुंची, बोगी में सवार मिथिलेश के सहयोगियों ने असलहा सटाकर उसे छुड़ा लिया, और फरार हो गए।
हेड कांस्टेबल पतरौल सिंह की तहरीर पर पुलिस ने जीआरपी मऊ थाने में रिपोर्ट दर्ज किया। साथ ही प्रथम दृष्टया तीनों सिपाहियों को दोषी पाते हुए गिरफ्तार कर लिया।
सीजेएम प्रमोद कुमार सिंह ने सुनवाई के बाद हेड कांस्टेबल पतरौल सिंह, कांस्टेबल जगवीर सिंह और विकास को ड्यूटी पर लापरवाही बरतने का दोषी पाते हुए जेल भेजने का आदेश दिया।