वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र में अगर अपने लिए नहीं पार्टी के लिए प्रचार करेंगे तो उन आयोजनों का खर्च उनके हिस्से नहीं आएगा। भाजपा के स्टार प्रचारक होने के नाते उन्हें देश भर में प्रचार के लिए चुनाव आयोग की ओर से सहमति है। ऐसे में अपने से संसदीय क्षेत्र में यदि व्यक्तिगत वोट न मांगकर पार्टी का प्रचार करेंगे तो वह पूरा खर्च पार्टी के खाते में जोड़ा जाएगा।
चुनाव आयोग की ओर से जारी दिशा निर्देश के अनुसार वाराणसी ऐसा संसदीय क्षेत्र है, जहां प्रत्याशी के आगमन पर जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भी आगवानी में जा सकते हैं। कारण पीएम के प्रोटोकॉल में चुनाव आयोग की ओर से यह निर्देश है। इसके अलावा एक मंच पर कई प्रत्याशी होने पर सबके हिस्से में बराबर आयोजन का खर्च जोड़ा जाएगा।
इसके अलावा शादी समारोह या सामूहिक दावत में प्रत्याशी को जाने की अनुमति होगी। मगर उस आयोजन में यदि मतदान की अपील की गई तो पूरा खर्च उनके हिस्से आएगा। जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि चुनाव आयोग के दिशा निर्देशों के अनुसार अधिकारियों का कार्य विभाजन किया गया है। प्रत्याशियों को खर्च सहित अन्य निर्देश के लिए राजनीतिक दलों को अवगत कराया जा रहा है।
आचार संहिता के बाद से पार्टी की ओर से आयोजित कार्यक्रम को प्रत्याशी से अलग रखा जाएगा। नामांकन जुलूस से प्रत्याशी का खर्च जुड़ेगा। वाराणसी में 70 लाख रुपये प्रत्याशी चुनाव में खर्च कर पाएंगे। नामांकन के बाद तीन बार खर्च का ब्योरा प्रस्तुत करना होगा।