फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्त्री की दुर्दशा का प्रमुख कारण है दहेज प्रथा

विज्ञापन
विज्ञापन
वाराणसी। मुंशी प्रेमचंद के उपन्यास सेवासदन के सौ वर्ष पूर्ण होने पर रविवार को लमही में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद के गांव में सेवासदन को सौ वर्ष नारी चेतना की अभिव्यक्ति विषयक संगोष्ठी में वक्ताओं ने सेवासदन के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हिंदुस्तान अकादमी के अध्यक्ष डॉ. उदय प्रताप सिंह ने कहा कि सेवासदन में दहेज प्रथा और बेमेल विवाह के कारण सुमन अधोगति प्राप्त करती है।
विज्ञापन

डॉ. नीरज खरे ने प्रेमचंद के लेखन में स्त्री स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की अभिव्यक्ति को रेखांकित किया। प्रो. इंदीवर ने प्रेमचंद के उपन्यास में चित्रित नारी दृष्टि के संदर्भ में जैनेंद्र, अज्ञेय आदि के उपन्यासों में नारी चरित्र की विशेषताओं का उल्लेख किया। दूसरे सत्र में डॉ. मनोज कुमार सिंह ने प्रेमचंद के योगदान को रेखांकित किया। अध्यक्षता करते हुए प्रो. बाबू राम त्रिपाठी ने कहा कि प्रेमचंद अपने समय की सामाजिक हलचलों को बखूबी समझते थे। समापन सत्र में डॉ. रामसुधार सिंह ने कहा कि प्रेमचंद का लेखन महात्मा गांधी के आंदोलन के साथ यात्रा करता है। सत्र के अध्यक्ष डॉ. सदानंद सिंह ने कहा कि प्रेमचंद का लेखन आज भी प्रासंगिक है। संचालन डॉ. ज्योति सिंह और धन्यवाद ज्ञापन राजीव गोंड ने किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें