वाराणसी। निजी वाहन पर प्रत्याशी के फोटो वाले पोस्टर और बैनर लगाकर प्रचार अभियान में शामिल हुए तो उसका खर्च चुनाव आयोग खर्च में जोड़ेगा। जिला स्तरीय पदाधिकारियों के चुनावी तैयारी से जुड़े विभिन्न दौरों को खर्च में शामिल नहीं किया जाएगा। प्रत्याशी के फोटो वाली टोपी, मफलर की कीमत भी उनके चुनावी खर्च का हिस्सा होंगी। इसके आवा साड़ी, धोती, शर्ट और टीशर्ट जैसे वस्त्रों पर चुनाव आयोग की रोक है। इसकी शिकायत पर आचार संहिता का उल्लंघन मानकर कार्रवाई की जाएगी।
रैली, जनसभा और रोड शो के दौरान निजी वाहनों से शामिल होने वालों का खर्च प्रत्याशी के चुनाव प्रचार का हिस्सा नहीं माना जाएगा। यदि इन वाहनों पर पोस्टर, बैनर और झंडे लगाकर रैली आदि में प्रचार के लिए इनका उपयोग किया जाएगा तो इसे प्रत्याशी के खर्चे में जोड़ा जाएगा। चुनाव आयोग दिशा निर्देश के अनुसार रैली, रोड शो आदि में व्यवसायिक वाहनों के प्रयोग पर उनका खर्च जोड़ा जाएगा। प्रत्याशी के लिए एक वाहन को अनुमन्य किया गया है। इस प्रचार वाहन में ईंधन और चालक के मासिक वेतन को जोड़ा जाएगा। इसके अलावा शामिल वाहनों को बाजार की कीमत पर खर्च में शामिल किया जाएगा। जिला निर्वाचन अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि चुनाव आयोग के निर्देश के अनुपालन के लिए वीडियो रिकार्डिंग सहित अन्य टीमें क्षेत्र में सक्रिय हैं। चुनाव आयोग की गाइड लाइन से सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को अवगत करा दिया गया है।
विज्ञापन, झंडा, बैनर और अन्य चीजों पर पार्टी का चिह्न व प्रत्याशी के फोटो से चुनाव खर्च अलग अलग किए जाएंगे। केवल पार्टी के चुनाव चिन्ह होने पर उसे पार्टी का खर्च और प्रत्याशी का फोटो होने पर उसे प्रत्याशी का खर्च माना जाएगा।