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अप्पा जी की याद में हर आंख पुरनम

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वाराणसी। द लीजेंड्स की शाम उप शास्त्रीय, लोक और फिल्मी गीतों से अप्पा जी के नाम समर्पित रही। बॉलीवुड गायक रूप कुमार राठौर ने अपनी बेटी रिवा राठौर के साथ काशी में पहली बार मंच साझा किया। उन्होंने कबीर के पद मोको कहां ढूंढे बंदे मैं तो तेरे पास...से शुरूआत की। इसके बाद उन्होंने ख्वाजा मेरे ख्वाजा दिल में समां जा...सुनाया तो दर्शकों ने भी उनके सुर से सुर मिलाया। साईं टेलीफिल्म की ओर से आयोजित दी लीजेंड्स का अमर उजाला मीडिया पार्टनर है।
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संगीत की शृंखला को आगे बढ़ाते हुए पिता के साथ पुत्री रिवा राठौर ने अलबेला सजन आयो रे, ए री सखी अति सुख पायो रे...सुनाया तो काशी की सुधि जनता ने हर-हर महादेव के जयघोष से उत्साहवर्धन किया। इसके बाद रूप कुमार राठौर ने उस्ताद अमजद अली और गुलजार के साथ बनाए गए एलबम वादा का गीत ऐसा कोई जिंदगी से वादा तो नहीं था सुनाया...तो श्रोता भी उठे। अपनी पत्नी सोनाली राठौर को समर्पित गीत तू ही तो जन्नत मेरी, तू ही तो मन्नत मेरी...सुनाकर माहौल को रूमानी कर दिया।
मंच पर बैठे जवानों को सैल्यूट करते हुए रूप कुमार राठौर ने बार्डर फिल्म का गीत संदेश आते हैं, हमें तड़पाते हैं...सुनाया तो हर हाथ में तिरंगा लहराने लगा। उन्होंने एक से एक देश भक्ति के गीत पेश किए। रूप कुमार राठौर, मालिनी अवस्थी और रिवा राठौर की छाप तिलक सब छीनी रे मोसे...पेश कर कार्यक्रम का समापन किया। संगत कलाकारों में तबले पर असरार अहमद, कीबोर्ड पर अजहर हुसैन, अश्विन रोकाड़े, गिटार पर सुशांत शर्मा, बांसुरी पर भाष्कर दास, आक्टो पैड पर हर्ष रहे।
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इसके पूर्व उपशास्त्रीय गायिका मालिनी अवस्थी ने अप्पाजी को नमन करते हुए ठुमरी राग मिश्र खमाज में नाजुक बइयां क्यों मरोडी रे सांवरिया...से शुरूआत की। दूसरी प्रस्तुति में उन्हाेंने दादरा जामुनिया के डार मैं तोड़ लाई...सुनाकर दर्शकों की वाहवाही बटोरी। उनके साथ तबले पर उस्ताद अकरम खां, सारंगी पर दिलशाद खां और हारमोनियम पर पं. धर्मनाथ मिश्र ने संगत की। संचालन लवलीन ने किया। इस दौरान निर्माता निर्देशक गजेंद्र सिंह, डॉ. सुधा दत्ता मुन्नी जी, कमिश्नर दीपक अग्रवाल, एनपी सिंह, रत्नेश वर्मा, अनिल जैन सहित कई कलाकार उपस्थित रहे।
गजेंद्र सिंह ने बताया कि वाराणसी के बाद मुंबई में 6 अप्रैल को पूरा बॉलीवुड अप्पाजी को इस आयोजन में इकट्ठा होकर याद करेगा। इसके बाद 12 अप्रैल को नई दिल्ली में राष्ट्र गौरव लाल किले पर गिरिजा देवी कड़ी का अंतिम आयोजन होगा। जहां से पूरा देश अपनी प्रिय पद्मविभूषण ‘ठुमरी साम्राज्ञी’ को याद करेगा।
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