वाराणसी। काशी का सबसे बड़ा आयोजन देव दीपावली शुक्रवार को मनाया गया। शाम को दीपदान कर घाटों को सजाया गया था। दीप मालाओं और निर्माल्य की सफाई नहीं होने से दूसरे दिन घाटों पर घूमना और गंगा में स्नान करना मुश्किल हो गया। लगातार चले सफाई अभियान के बाद घाट तो साफ हुए लेकिन गंगा की गंदगी उसी तरह तैरती रही। शाम तक गंगा की सफाई चलती रही और 30 मीट्रिक टन कचरा निकला।
कार्तिक पूर्णिमा पर करीब 12 लाख से अधिक लोगों ने देव दीपावली देखी, वहीं इस दौरान 15 लाख दीपक जलाए गए, आतिशबाजी व अन्य पूजन पाठ के अलावा श्रद्धालुओं ने सुबह लोगों ने गंगा स्नान कर माला फूल अर्पित किए लेकिन ज्यादातर निर्माल्य घाटों पर और गंगा में प्रवाहित कर दिया। इससे घाट और गंदगी के चलते चारों ओर कचरा ही कचरा हो गया था। घाटों पर लगातार चल रहे सफाई अभियान के बाद भी शनिवार की शाम तक तो साफ कर दिया गया लेकिन कचरो एकत्र हो गया। वहीं गंगा के जल की सफाई न होने के चलते सुबह श्रद्धालुओं को स्नान करने में परेशानी हुई। कंपनी के अधिकारी अनुपम मिश्रा ने बताया कि शाम तक सफाई का काम पूरा हुआ, जिसमें आम दिनों में जहां 8 मीटर से 10 मिनट कचरा निकलता था वहीं शनिवार को 30 मैट्रिक टन कचरा निकला। वहीं गंगा का कचरा कुछ पानी में बैठ गया तो कुछ बह गया।