भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में निरुद्ध आरएस यादव के रैकेट का हिस्सा रहे परिवहन अधिकारी भी प्रवर्तन निदेशालय की जांच के दायरे में हैं। ये वो अधिकारी हैं जो बार-बार यादव की करतूतों पर पर्दा डालते रहे। फिलहाल आरएस की काली कमाई के सबूत जुटाकर ईडी की टीम शुक्रवार को लखनऊ लौट गई। सूत्रों के मुताबिक टीम जल्द ही कुछ अधिकारियों को लखनऊ तलब कर सकती है। परिवहन विभाग के उच्चाधिकारियों से यादव का सर्विस रिकॉर्ड भी तलब किया गया है। ईडी पता लगा रही है कि ऐसे कौन से नेता और अफसर रहे हैं जिनकी वजह से आरएस की ज्यादातर नौकरी वाराणसी मंडल में ही चलती रही।
पिछले 20 साल में सरकार चाहे जिसकी रही हो लेकिन आएस यादव का सिक्का चलता रहा। उसे मनचाहे जिलों में तैनाती मिलती रही। हर सरकार में कुछ कद्दावर मंत्री और अफसर उसकी पैरवी में रहते थे। इस दौरान यादव ने ओवरलोड ट्रकों की वसूली से अकूत संपत्ति अर्जित की। निजी चालक महेंद्र मौर्या के नाम से 50 करोड़ की लागत का होटल वेस्ट इन और परिवार के सदस्यों एवं दोस्तों के नाम से मकान, प्लाट समेत अन्य संपत्तियां खरीदीं। ब्लैक मनी को ह्वाइट करने के लिए कई बोगस कंपनियां भी बनाई। ईडी ने इन सारे तथ्यों की जानकारी दो दिन की पड़ताल के बाद जुटा ली है। बरामद किए गए संपत्ति के कागजात के आधार पर कुछ नए खुलासे भी हो सकते हैं।