आजमगढ़। एक सप्ताह में रानी की सराय, अहरौला और महराजगंज थाना क्षेत्र में ताबड़तोड़ हुए तीन मुठभेड़ में 50 और 40 हजार के दो-दो बदमाशों की गिरफ्तारी से लोगों में सुकून है। दूसरी ओर दिन हर बार सुनसान रास्तों पर ही मुठभेड़ होना, खोजने पर भी प्रत्यक्षदर्शी नहीं मिलने से लगता है कि जैसे सबकुछ पहले से ही तय था। 14 अगस्त की रात रानी की सराय थाने की पुलिस और बदमाशों के बीच रुदरी नहर की पटरी पर रात आठ बजे के बाद मुठभेड़ हुई। इसमें रानी की सराय थाने के जमालपुर गांव निवासी 50 हजार का इनामी विजय यादव पुलिस की गोली से घायल हुआ। साथी फरार हो गया। फरार बदमाश की पहचान तक नहीं हो पाई। दूसरी मुठभेड़ 17 अगस्त की रात अहरौला बाइपास पर हुई। इसमें अतरौलिया का रहने वाला 50 हजार का इनामी अकबर अली पुलिस की गोली से घायल हुआ, जबकि उसके दो साथी फरार हो गए। इसकी जांच पड़ताल की चर्चाओं के बीच अकबर के फरार दोनों साथी 40-40 हजार रुपये के इनामी सचिन पांडेय उर्फ आकृति और सुजीत तिवारी दूसरे दिन 18 अगस्त की शाम साढ़े तीन बजे महराजगंज थाने के कटानी बाजार के पास हुई मुठभेड़ में घायल हो गए। पहले अकबर की गिरफ्तारी, फिर उसका भागना, मुठभेड़ में उसी का घायल होना, अगले दिन फिर मुठभेड़ और इसमें भी उसी के फरार दोनों साथियों का घायल होना। एक-एक कर संयोग लोगों की समझ से परे हैं। हालांकि 18 की मुठभेड़ दिन के तीन बजे के बाद दिखाई गई लेकिन न तो न कोई शोर-शराबा हुआ, न ही भगदड़। यहां कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं मिला। ले-देकर सारी कहानी फिर से फिल्मी हो गई।
कुछ लोग बिगाड़ना चाहते थे माहौल
आजमगढ़। अहरौला बाजार निवासी दुकानदार जितेंद्र मोदनवाल उर्फ नाटे की 11 अगस्त की सुबह हत्या करने वाले बाइक सवार बदमाशों की गिरफ्तारी से पर जहां भाजपाई पुलिस की पीठ थपथपा रहे हैं वहीं पुलिस की माने तो यहां माहौल खराब करने की साजिश रची गई थी। घटना से आक्रोशित बाजार के लोगों ने शव रखकर सड़क जाम कर दी। एसपी रविशंकर छवि ने 24 घंटे में खुलासे का आश्वासन देकर लोगों को शांत कराया था। एसओ अयोध्या तिवारी की मानें तो वह हत्या की जानकारी मिलते ही दलबल समेत सीएचसी पहुंच गए थे। कुछ लोगों को बदमाशों के पीछे लगा दिया गया था। इसी बीच अफवाह फैला दी गई कि पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। लोगों को उकसाकर माहौल बिगाड़ने का पषड्यंत्र रचा गया। एसपी के समझाने पर जितेंद्र के परिवार के लोग भी मान गए थे लेकिन कुछ लोग मामले में हवा भर रहे थे। एसपी रविशंकर छवि भी मानते हैं कि कुछ लोग हत्या को राजनीतिक रंग देना चाहते थे। खुफिया तंत्र से इसकी जानकारी हुई। घटना के खुलासे के लिए पुलिस की कई टीमें लगाई गई थी, जिसका परिणाम लोगों के सामने है।