वाराणसी। डीजल रेल कारखाना (डीरेका) में विकसित डिस्ट्रीब्यूटेड पावर कंट्रोल सिस्टम (डीपीसीएस) तकनीक पर दो किलोमीटर से ज्यादा लंबी मालगाड़ी का संचालन जल्द शुरू हो सकता है। ओडिशा के ईस्ट रेलवे के संबलपुर संभाग में गोडभागा से बालांगीर रेलवे स्टेशनों के बीच दो किलोमीटर लंबी मालगाड़ी का सफलतापूर्वक ट्रायल किया गया है।
डीपीसीएस से एक ही रेल इंजन में बैठा हुआ पायलट व लोको पायलट दो-तीन रेल इंजनों का परिचालन कर सकता है। ट्रायल पर चलाई गई मालगाड़ी में 147 वैगन, तीन गार्ड वैन व चार इंजन लगाए गए थे। ट्रेन सिंगल सिग्नल पर चली और 145 किलोमीटर की दूरी तय की। ट्रायल रन की सफलता के बाद देश में लंबी ट्रेनों के संचालन की उम्मीद जग गई है। इससे न केवल श्रम बल्कि समय की भी बचत होगी।
भारतीय रेलवे में अभी तक आधा-पौन किलोमीटर लंबी मालगाड़ियों का संचालन हो रहा है। चढ़ाई या ढलान के दौरान लंबी मालगाड़ियों में लगाए जाने वाले दो-तीन इंजनों में उतने ही लोको पायलट और को पायलट की जरूरत होती है।
लंबी मालगाड़ियों में परिचालन के दौरान इंजन में बैठे हुए लोको पायलट व को पायलट को दूसरे इंजन में बैठे क्रू मेंबर से सामंजस्य बनाने में परेशानी आती है। दरअसल, रफ्तार बढ़ाने, घटाने व ब्रेकिंग के दौरान एक साथ सभी इंजनों के लोको पायलट व को पायलट को यह प्रक्रिया करनी होती है। दूसरी ओर डीपीसीएस में पायलट इंजन में ही लोको पायलट और को पायलट की जरूरत होती है। बाकी अन्य इंजनों में लोको पायलट की जरूरत नहीं होती है। पायलट इंजन से मिलने वाले कमांड से अन्य रेल इंजन ऑटोमैटिक उसी मोड (समान रफ्तार, ब्रेकिंग) में आ जाते हैं। ट्रेन में आगे, मध्य में और पीछे इंजन लगाए जाते हैं।