वाराणसी। लोकसभा चुनाव में वाराणसी सीट से पीएम मोदी के खिलाफ अभी तक विपक्ष ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। संजीवनी की तलाश में कांग्रेस भी फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। प्रियंका गांधी के दौरे के बाद स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ता अब उम्मीदवार की मांग करने लगे हैं। इसके चलते चुनाव प्रचार भी शुरू नहीं हो सका है। राजनीतिज्ञों की मानें तो वाराणसी संसदीय क्षेत्र पर पीएम मोदी के खिलाफ विपक्ष साझा उम्मीदवार भी लेकर मैदान में उतर सकता है। हालांकि भाजपा ने पीएम मोदी को दोबारा उम्मीदवार बनाने की घोषणा करके तैयारियां भी शुरू कर दी हैं, वहीं कांग्रेस टिकट बंटवारे में उलझी हुई है।
प्रियंका गांधी के दौरे के बाद संभावना जताई जा रही थी कि बनारस से उम्मीदवार की घोषणा हो जाएगी। स्थानीय नेताओं ने भी प्रियंका गांधी के सामने इस बात को रखा था तो उन्होंने जल्द से जल्द इसकी घोषणा की बात कही थी। पांच दिन बीतने के बाद भी अभी तक दिल्ली से इस बारे में कोई सूचना नहीं जारी हुई है। बूथ स्तर पर कार्यकर्ता तो तैयारी में लगे हुए हैं लेकिन वह किस उम्मीदवार के लिए वोट मांगें उनके सामने भी संशय की स्थिति बनी हुई है। प्रियंका गांधी के दौरे के दौरान गुटबाजी से आजिज पुराने कांग्रेसी नेताओं ने तीसरे उम्मीदवार की मांग की थी। सोशल मीडिया पर संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र नाम की चर्चाएं भी जोरों पर हैं। हालांकि महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने इससे इंकार किया है।
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक यह सही है कि इस पर पार्टी गंभीरता से विचार कर रही है। सूत्रों ने बताया कि प्रियंका गांधी के अयोध्या दौरे से लौटने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रत्याशी का चयन हो जाएगा। बता दें कि सपा-बसपा गठबंधन में वाराणसी सीट सपा के खाते में आई है। 2014 में सपा ने इस सीट से कैलाश चौरसिया को उम्मीदवार बनाया था जबकि कांग्रेस के टिकट पर पूर्व विधायक अजय राय लड़े थे हालांकि वह अपनी जमानत भी नहीं बचा सके थे। यही कारण है कि कांग्रेस प्रत्याशियों की घोषणा में जल्दबाजी करने के बजाय सभी समीकरणों पर विचार कर रही है। वाराणसी सीट से पूर्व विधायक अजय राय और काशी विद्यापीठ के सेवानिवृत्त प्रो. अनिल उपाध्याय ने दावेदारी पेश की थी। पार्टी के जिलाध्यक्ष प्रजानाथ शर्मा का कहना है कि मार्च के अंत तक प्रत्याशी के नाम की घोषणा हो सकती है।