वाराणसी। नगर निगम द्वारा नावों में सीएनजी इंजन लगाने का काम बेपटरी हो चुका है। इंजन के पार्ट और मैकेनिकों के कमी की वजह से नाविक सीएनजी इंजन हटाकर डीजल इंजन की ओर लौट रहे हैं। सीएनजी इंजन में किसी भी समस्या के लिए ऑन काल व्यवस्था की गई थी, वहां कोई रिस्पांस नहीं मिल रहा है।
गंगा में प्रदूषण स्तर कम करने के लिए इस्पात मंत्रालय के अधीन मेकॉन को डीजल से चलने वाली नावों को सीएनजी से बदलने का काम करना था। चार साल बाद भी लक्ष्य हासिल नहीं हो सका। अब तो नाविक सीएनजी इंजन से मुंह मोड़ने लगे हैं। नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक पिछले चार वर्ष में 783 नावों में सीएनजी इंजन लगा है, जबकि एक साल में 900 मोटर बोट को सीएनजी में बदलने का लक्ष्य रखा गया था।
नाविक मनीष साहनी ने बताया कि सीएनजी इंजन लगाते समय कहा गया कि दो वर्ष तक फ्री सर्विसिंग देंगे, लेकिन इंजन के पार्ट खरीदने पर भी नहीं मिल रहे हैं। योगेंद्र, कृष्ण, दीपक साहनी ने बताया कि 20 दिन पहले सीएनजी किट में समस्या आई थी। कई बार इसकी जानकारी दी गई, लेकिन 20 दिन बाद भी कोई बनाने नहीं आया। अंगद साहनी ने बताया कि नाव बनवाने में समस्या आ ही रही है। उसके पार्ट के लिए महीनों इंतजार करना पड़ रहा है।