ठाकुर जी को चढ़ा च्यवनप्राश का भोग
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धर्मसंघ दुर्गाकुंड स्थित मणि मंदिर में मंगलवार को अन्नकूट शृंगार में ठाकुर जी को च्यवनप्राश का भोग लगा। च्यवनप्राश का भोग लगाकर यहां काशीवासियों को बुखार, चिकनगुनिया और डेंगू से मुक्ति दिलाने की कामना की गई। इतना ही नहीं, मंणि मंदिर में पहली बार घर की रसोई में तैयार व्यंजनों से प्रभु को भोग लगा। उधर, बाबा विश्वनाथ को 21 क्विंटल का भोग लगाया गया। मणि मंदिर में यह पहला अवसर था जब अन्नकूट पर्व पर गृहस्थों ने ठाकुर जी को भोग लगाने के लिए अपने घर की रसोई में व्यंजन तैयार किए। कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य स्वामी शंकर विजयेंद्र सरस्वती ने भी अन्नकूट की झांकी के दर्शन किए। पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज के सानिध्य में 51 क्विंटल प्रसाद का भोग लगा। पं. जगजीतन पांडेय के आचार्यत्व में देव विग्रहों की आरती हुई। अन्नकूट का प्रसाद बुधवार को वितरित होगा।
पंच बदन की प्रतिमा की गई स्थापित
काशी विश्वनाथ धाम में भी अन्नकूट का शृंगार हुआ। दोपहर में भोग आरती के बाद पंच बदन रजत प्रतिमा स्थापित की गई। बाबा को 21 क्विंटल निर्मित 56 भोग लगाया गया। बाबा के दरबार में भक्तों ने रात तक दर्शन किए। शाम को आरती के बाद माता अन्नपूर्णा के अन्न और धन का वितरण हुआ। परंपरा के मुताबिक टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास से ले जाकर भगवान शिव परिवार की रजत चल प्रतिमा गर्भगृह में प्रतिष्ठित की गई। नाटकोट क्षेत्र के पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज व डमरूवादन के बीच बाबा की चल रजत प्रतिमा विश्वनाथ मंदिर में स्थापित की गई। डॉ. कुलपति तिवारी ने दीक्षित मंत्र से बाबा का पूजनकर अन्नकूट का भोग लगाया। शाम को बाबा की चल रजत प्रतिमा पुन: महंत आवास पर चली गई।