मिसाइल तकनीक में आज भारत आत्मनिर्भर है। आज हम किसी भी तरह की मिसाइल तैयार कर सकते हैं। भारत रक्षा निर्यात में तेजी से आगे बढ़ रहा है। 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारा दिया था जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान। आने वाली सदी भारत की है और आप भारत के भविष्य हैं। मैं चाहता हूं कि संस्थान से शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र डीआरडीओ में भी अपना कॅरिअर बनाएं। विज्ञात और तकनीक से सिर्फ हमारा जीवन नहीं बल्कि देश की पूरी अर्थव्यवस्था बदल सकती है।
डीआरडीओ के चेयरमैन डॉ. समीर वी कामथ ने कहा कि आज यूएस और चीन के बाद हम तीसरी बड़ी शक्ति बनकर उभरे हैं जो पूरी दुनिया में स्टार्ट अप इकोसिस्टम बन गए हैं। भारत के प्रधानमंत्री के विजन ’आत्मनिर्भर भारत’ और टेक्नोलॉजी लीडर के तौर पर देश का भविष्य उज्ज्वल है। साइंस और टेक्नॉलॉजी के चलते ही हमने कोरोना महामारी से बचने के लिए कोवैक्सिन, कोविड 19 वैक्सिन, मिशन शक्ति, चंद्रयान-3, आदित्य एल 1 मिशन जैसी उपलब्धियां हासिल कीं।
डॉ. कामथ ने कहा कि डीआरडीओ देश के शिक्षण संस्थानों में 15 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस खोल रहा है जहां इनोवेशन और कटिंग एज टेक्नोलॉजी पर फोकस किया जाएगा। डीआरडीओ ने यंग साइंटिस्ट प्रयोगशाला का शुभारंभ किया है जिसमें निदेशक की उम्र 35 साल से कम होगी। हमारा प्रयास है कि यह प्रयोगशाला एक स्टार्टअप की तरह काम करे। इमर्जिंग टेक्नोलॉजी पर काम करने के लिए यह प्रयोगशाला प्रतिबद्ध है जैसे साइबर फिजिकल सिस्टम, क्वांटम टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, मशीन लर्निंग, स्मार्ट मैटेरियल्स और सिमेट्रिक टेक्नॉलॉजी।