वाराणसी में शुक्रवार को पातालपूरी मठ में कथा करते बालक दास संवाद
पातालपुरी सनातन धर्म रक्षा परिषद और विशाल भारत संस्थान की ओर से पातालपुरी मठ नरहरपुरा में चल रही नौ दिवसीय श्रीराम परिवार गाथा के दूसरे दिन शुक्रवार को भारत के गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक मूल्यों पर चर्चा हुई। जगद्गुरु बालक देवाचार्य ने कहा कि आज भारत में वृद्धाश्रम की बाढ़ आ गई है, क्योंकि माता-पिता को बोझ समझने वाली संस्कृति की शिक्षा बच्चों को दी जा रही है। उन्होंने इतिहासकारों और सरकार से राम के इतिहास को बचपन से पाठ्यक्रम में शामिल करने की वकालत की। कहा कि बच्चों को श्रीराम के दर्शन का अनुसरण करना होगा। बीएचयू की इतिहास विभाग की सहायक प्रो. मृदुला जायसवाल ने कहा कि वाल्मीकि रामायण में श्रीराम ने माता-पिता के आदेश पर राजगद्दी छोड़कर वन जाने का त्याग उच्च आदर्श है। जयपुर से आए महंत अवधेश दास ने कहा कि राम के आदर्श और मूल्य दुनिया के किसी भी परिवार के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि राम ही भारत के पर्याय हैं। वहीं, सावन मास पर मठ में जगद्गुरु बालक देवाचार्य के सानिध्य में वैदिक ब्राह्मणों व बटुकों ने 11 हजार पार्थिव शिवलिंगों का पूजन किया।